कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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नवमी में विधि के साथ पूजा जागरण और बलि करे । दशमी में क्रीड़ा,
कौतुक, मंगलों द्वारा सम्प्रेषण करे । दशमी में नीराजन करे जो महान्
बल और वृद्धि का करने वाला होता है ।
जिस समय जगन्मयी वैष्णवी देवी महामाया का पूजन करे वहाँ पर
उस अवसर पर जो विशेषता है उसका, हे भैरव! अब आप श्रवण
करिए । सूर्य के कन्या राशि पर संस्थित होने पर जो पूजा है वह शुक्ल
पक्ष की अष्टमी तिथि है उस तिथि में रात्रि से वैभव के सितारों से पूजा
करनी चाहिए । नवमी से यथाविधि बलिदान करना चाहिए । वहाँ पर
विशेष भूति के लिए जप, होम विधि के साथ ही करना चाहिए ।
मनुष्य को महादेवी का अष्ट पुष्पिका से भली-भाँति पूजन करना
चाहिए । पहले समय में श्रीराम के ऊपर अनुग्रह करने के लिए रावण
वध के लिए ब्रह्माजी के द्वारा महादेवी रात्रि में ही बोधित की गई थी ।
इसके अनन्तर वह निद्रा का त्याग करके नन्दा में आश्विन मास के
शुक्ल पक्ष में नन्दा तिथि में गमन करने वाली हुई थी । जहाँ पर पहले
श्री राघवेन्द्र थे वहाँ से लंका में गये थे । वहाँ पर महादेव जी ने गमन
करके उस समय में राम और रावण को युद्ध करने के लिए नियोजित
कर दिया था और अम्बिका देवी स्वयं अन्तर्धान हो गई थी । वहाँ
बानरों और राक्षसों के माँस और रुधिर का भक्षण किया था ।
उस देवी ने श्रीराम और रावण का युद्ध एक सप्ताह तक नियोजित
किया था । सातवीं रात्रि के समाप्त होने पर फिर नवमी में रावण को
श्रीराम ने मार दिया था । वह जगन्मयी महामाया देवी ने उन दोनों की
जब तक युद्ध की केलि हुई थी उसको स्वयं देखा था । तब तक सात
रात्रियों में वह ही देवों द्वारा सुपूजित हुई थी और रावण के निहित हो
जाने पर नवमी तिथि में समस्त देवगणों के द्वारा पूजा की गई थी ।
लोकों के पितामह श्री ब्रह्माजी ने दुर्गा देवी की विशेष पूजा की थी ।
इसके अनन्तर शार्वरोत्सवों के द्वारा देवी दशमी तिथि में देवी सम्प्रेषित
की गई थी । इन्द्रदेव ने देवसेना का नीराजन किया था । और वह
नीराजन देवसेना में शान्ति के लिए और देवों के राज्य की वृद्धि के