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सर्वकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 314, कुल 442 में से

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पृष्ठ 314

൵७०४ श्रीकालिका पुराण ൵७०४ ३१७
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शम्भु चूड़ा और बिन्दु से युक्त हो वह प्रसाद कहा जाता है ।
वासुदेव इन्द्र बिन्दुओं से कर्म बीज जानना चाहिए । व्यञ्जन और आद्य
दन्त्य और आद्य दन्त्य पूर्वक तथा पीछे आद्य दन्त्यद्वय व्यंजन होवे
जिसके उत्तर में प्रणव हो, यह ब्रह्मबीज कहा गया है जो सब पापों
का विनाश करने वाला है । मुख की शुद्धि के लिए प्रथम दीर्घ प्रणव
का उच्चारण करे । वासुदेव के बीज के द्वारा प्राणायाम का समाचरण
करे । जिस देव का जो भी रूप हो वैसा ही भूषण और वाहन होना
चाहिए । उसके पूजन में वह ही पूरक आदि के द्वारा चिन्तन करना
चाहिए । जो सदा पूर्ण चन्द्र के समान है । प्रथम गंगावतार बीज से धेनु
मुद्रा के द्वारा अर्घ्यपात्र के सहित जल में अमृतीकरण करना चाहिए ।
चन्द्र के खण्ड से युत कण्ठ में पञ्चमी बल बीजक है ।
यह गंगावतार बीज है जो सब पापों का नाश करने वाला है । दो
मात्राओं से युत विष्णु बलबीज उदाहृत किया गया है । अमृतीकरण के
होने पर जो जल दिया जाता है, वह अमृत होकर सुरों के पूजन में
देवता की प्रीति के लिए जाया करता है । पूजा के मात्र के जल की
और गंगा भी स्वयं आ जाया करती है । धर्म, काम और अर्थ की
सिद्धि के लिए अमृतीकरण करना चाहिए । अभीष्ट सुर पूजन में
स्वास्तिक, गोमुख, पद्म अर्धस्वस्तिक, पर्यंक आसन प्रशस्त होते हैं ।
वह पादयन्त्र कहा गया है जो सब मन्त्रों से स्वत्युत्तम है । दूध पुरुष को
उसे प्रथम वाराह के बीज के साथ प्रथम ग्रहण करना चाहिए ।
अग्निबीज काया आदि समव्याप्तिक चतुर्थ छठवें स्वरोपरिचर वाराह
बीज कहा जाता है । मन्त्र के दो पादों में किया हुआ वाराह बीज संशुद्ध
है । अभीष्ट देव का दर्शन करते हुए पाद रोष को नहीं देखा करता है ।
अन्य प्रकार से सुरों के पूजन में पाददर्शन युक्त नहीं होता है । मन्त्र
के द्वारा अभीष्ट का लाभ किया करता है । इस कारण से मन्त्र में ही
होना चाहिए । साधना करने वाले पुरुष को कर्म मन्त्र के द्वारा कर की
कच्छपिका बनावे । वहाँ पर संस्कार किए हुए पुरुष से अपने शरीर का
पूजन करे । उस पुष्प के द्वारा पूजित होने पर अपने आपको देवत्य हो