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सर्वकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 285, कुल 442 में से

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पृष्ठ 285

ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ २८७
से युक्त हैं जिसकी मूर्ति परमदिव्य है और वे मनोहर हैं । ईशान
श्यामल हैं और सर्वदा ही शिव स्वरूप हैं । आद्य स्वरूप का पश्चिम
दिशा में चिन्तन करना चाहिए । उत्तर दिशा में द्वितीय स्वरूप का
चिन्तन करें । अघोर देव का दक्षिण में तथा पूर्व दिशा में तत्पुरुष का
चिन्तन करना चाहिए । मध्य भाग में ईशान का भक्ति तत्पर होकर
चिन्तन करना चाहिए । दक्षिण भाग के हाथों में शक्ति, त्रिशूल,
खट्वाङ्ग, वरदान, अभय दान के दाता शिव का चिन्तन करना चाहिए
उसी भाँति वाम भाग के हस्तों में अक्ष, सूत्र, बीजपुर, भुजङ्ग, डमरू
और शुभ उत्पल का ध्यान करे । आठ ऐश्वर्यों से समायुक्त हृदय में
विराजमान शिव का ध्यान करना चाहिए ।
इस प्रकार से ध्यान में जगत् के स्वामी महादेवजी का चिन्तन
करना चाहिए और द्वारपालों का चिन्तन करके गणेश आदि का पूजन
करे । इसके अनन्तर पुनः पाँचों भूतों के विशुद्धि का चिन्तन करे ।
इसके उपरान्त आठ नामों के द्वारा आठ मूर्तियों का अभ्यार्चन करे ।
भवादि आठ पुष्पों का हृदय के द्वारा ही विनियोजन करना चाहिए और
जो समस्त आसन्न हों उनका भी पूजन करे । नाराच मुद्रा से उसका
ताड़न परिकीर्तित किया गया है और धेनु मुद्रा दिलाकर विधान से
विसर्जन करे । सदा ही वृद्धि से दण्डेश्वर प्रभु का निर्माल्य धारण
करना चाहिए । प्रत्येक का पांच मन्त्रों के द्वारा अंगादि प्रमार्जन करे ।
हे नर श्रेष्ठों! इन पूर्व में वर्णित सम्पद आदि के द्वारा इसका प्रमार्जन
करना चाहिए । फिर आठ देवियों का पूजन करे । उनके नाम
हैं-बाला, ज्येष्ठा, रौद्री, काली, कलविकरणी, देवी, बलप्रमथिनी
और सब भूतों की दमनी मनोन्मथिनी ।
इन आठ देवियों का यजन क्रम से भगवान् शम्भु की प्रीति के
लिए करना चाहिए । इस रीति से शम्भु का पूजन करके ध्यान में
परायण मन वाला हो जावे । फिर अपने श्री गुरुदेव का और मन्त्र का
ध्यान करके माला का आदान कर जप करना चाहिए । एक ही पाँच
अक्षरों वाला मन्त्र अथवा एक प्रसाद होवे । उसी में समासक्त मन वाले