कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
पृष्ठ 278, कुल 442 में से
संदर्भ में पढ़ें२८० ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
दिया गया था और पुराने समय में जिस तरह से वे दोनों तारावती के
उदर से समुत्पन्न हुए थे। अथवा जिस प्रकार से नारदजी के द्वारा नृप
के संशय का छेदन हुआ था वह सभी कुछ गिरीश के पुत्रों से कह
दिया था। उस समय वे दोनों महात्मा वेताल और भैरव यह श्रवण
करके परम हर्ष से संयुक्त हुए थे। उस अवसर पर मोह से पूर्ण होकर
सुधा से सिक्त के ही भाँति वे हो गये थे। फिर वेताल और भैरव ने
कपोत मुनि से पूछा था। हम दोनों के पिता महादेव हैं-यह आपने सत्य
ही कहा है। हे मुनि श्रेष्ठ! वे जिस रीति से हम दोनों के द्वारा आराधना
करने योग्य होवें अथवा जिस स्थान पर उनकी आराधना की जावे
जिससे हम दोनों को सिद्धि होवे। जिसके द्वारा वे शीघ्र ही प्रसन्नता को
प्राप्त होवें। हे महामते! वह ही हमको आप बताने की कृपा करें। हम
दोनों परम धन्य हैं कि आपने हम दोनों पर परम अनुग्रह किया है। हे
मुनि श्रेष्ठ! आपने यह सब विज्ञापित कर दिया है और हम दोनों के
हृदय कृतज्ञ हैं कि आपने हम दोनों पर अनुग्रह किया है। हे मुनि श्रेष्ठ!
आपने यह सब विज्ञापित कर दिया है और हम दोनों के हृदय का शल्य
आपने उद्धृत कर दिया है। अर्थात् हमारे हृदय का शल्य की ही भाँति
जो दुःख था वह दूर कर दिया है। हे मुनीश्वर! आप तो कृपा से
परिपूर्ण हैं। पुनः हमारे ऊपर दया कीजिए। जिस रीति से हम शीघ्र ही
भर्ग की प्राप्ति कर लेवें उसी भाँति आप हम को बताइए।
मुनि ने कहा-आप सुनिए, में आज बताता हूँ कि जहाँ पर
आराधना किए हुए भगवान् हर शीघ्र ही आपके समझ में समागत हो
जायेंगे। जहाँ पर नित्य ही महादेव निवास करते हुए तुष्टि के लिए होते
हैं आप दोनों को उस स्थान को बता दूँगा। वह स्थान गोपनीय है।
वाराणसी नाम वाली पुरी है जो परम सुन्दर भागीरथी गंगा के तट पर
बसी हुई है वहाँ पर वृषभध्वज स्वयं नित्य ही निवास किया करते हैं।
वे योगी सदा ही योगियों की प्रीति के करने वाले हैं। वे स्वयं योगी
हैं और अध्यात्म चिन्तन करने वाले हैं। वह पुरी आकाश में संस्थित
है और नित्य ही भगवान् भर्ग के योग से धारण की हुई है। वहाँ पर