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सर्वकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 172, कुल 442 में से

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पृष्ठ 172

१७४ || श्रीकालिका पुराण ||

गदा, पद्म, शाधनुषंग तथा अनेक आयुधों को जो भी अन्य उनके
अस्त्र थे उनको आग्नेय दिशा वाले फन से धारण किया था। उस
समय में भगवान हरि के शयन अर्थात् शय्या के लिए अपने स्वकीय
शरीर को बनाकर जल से मग्न पृथ्वी का अधरकाय से आक्रमण
करके स्थित हुए थे। त्रैलोक्य ब्रह्म के सहित तथा लक्ष्मी से समन्वित,
सामासंग, जगत् के बीज स्वरूप और जगत् के कारण के भी कारण
जनार्दन प्रभु को धारण किया था। वे जनार्दन प्रभु नित्य आनन्द स्वरूप
हैं, वेदों से परिपूर्ण हैं, ब्रह्मण्य हैं जगत् के कारण के भी कारण हैं,
जगत के कारण कर्त्ता हैं, परमेश्वर हैं, भूत, भव्य और भव के नाथ
हैं, बराबर गति से संयुत हैं ऐसे हरि को शिर से धारण किया था और
अपने शरीर को भी धारण कर लिया था। इस रीति से अव्यय
नारायण हरि भगवान् ब्रह्माजी ने दिन के प्रमाण से निशा और संध्या
को अभिव्याप्त करके शयन किया करते हैं। यह प्रलय जिससे ब्रह्मा
के दिन-दिन में होती है। इसी कारण से पुरातत्व के ज्ञानीजन इसको
दैनन्दिन ख्यापित किया करते हैं अर्थात् कहा करते हैं।
उस निशा के व्यतीत हो जाने पर लोकों के पितामह ब्रह्माजी निद्रा
को त्याग करके पुनः सृष्टि की रचना के लिए समुत्थित हो गये थे
अर्थात् जागकर खड़े हो गये थे। उन्होंने देखा कि तीनों लोक जल से
परिपूर्ण भरे हुए हैं और भगवान पुरुषोत्तम शयन किये हैं। भगवान
विष्णु को जगन्मयी महामाया का उन्होंने निरीक्षण किया था फिर
ब्रह्माजी ने भगवान हरि के अंग में विराजमान योगनिद्रा की स्तुति की
थी। ब्रह्माजी ने कहा-चित्तशक्ति अर्थात् ज्ञान की शक्तिरूपा, विकारों
से रहित, परब्रह्म के स्वरूप वाली, सनातनी महामाया योगमाया को मैं
प्रणाम करता हूँ। हे देवी! आप योगियों की विद्या हैं, आप ही गति,
मति और स्तुतिरूपा हैं। आप सृष्टि, स्थिति, स्वाहा, स्वधा और आप
ही गीतिका हैं। आप सामवेद की नीति हैं और आप ह्रीं, श्रीं और
सरस्वती हैं। आप महामाया, योगनिद्रा, मोहनिद्रा और आप ईश्वरी हैं।
आप कान्ति हैं, सर्वशक्ति हैं और आप वैष्णवी शिवातनू हैं। आप