कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंगुढार्थचिन्तामणिकोष ।
(१४५)
| सत्यवादी | पाखण्ड | आस्तिक | नास्तिक, | शुक्ल | कृष्ण |
|---|---|---|---|---|---|
| मित्र | शत्रु | महावाक्य | अवांतर | ||
| त्राक्य. | प्रकाश | अन्धकार | |||
| निर्विकल्प | सविकल्प | निरंजन | अद्या | शीत | उष्ण |
| सूक्ष्म | स्थूल | जंगम | स्यावर | ||
| खुदा | बन्दा | कादिर | कुदरत | ||
| आदम | हून्वा | खास | आम | इनसान | हैवान |
॥ त्रैयविधि ॥
ओंकार मात्रा | अ | उ | म | |
---|---|---|---|---|---
| | क्षर | अक्षर | निः अक्षर |
| | हिरण्यगर्भ | ईश्वर | विराट |
| | विश्व | तैजस | प्राज्ञ |
देव | | ब्रह्मा | विष्णु | महेश |
| | विबेक | वैराग्य | गुरुभक्ति |
गुण | | रजोगुण | सतोगुण | तमोगुण |
शरीर | | स्थूल | सूक्ष्म | कारण |
| | नाम | रूप | गुण |
काल | | भूत | वर्तमान | भविष्य |
क्रिया | | उत्पत्ति | पालन | नाश |
अर्थ | | स्वार्थ | परमार्थ | निरर्थ |
अवस्था | | जाग्रत | स्वप्न | सुषुप्ति |
वेदकांड | | कर्म | उपासना | ज्ञान |
| | कर्म | धर्म | मति |
महावाक्य | ॥ (सा. वे.) | तत् | त्व | असि |
॥ (ऋग्वेद) | | अहं | ब्रह्म | अस्मि |
॥ (यजुर्वेद) | | अयं | आत्मा | ब्रह्म |
॥ (अथर्वणवेद) | | प्रज्ञान | आनंद | ब्रह्म |
नाडी | | इंगला | पिंगला | सुषुम्णा |
| | यमुना | गंगा | सरस्वती |
प्राणायाम | | रेचक | पूरक | कुम्भक |
दोष | | वायु | पित्त | कफ |
लोक | | मृत्युलोक | स्वर्ग | पाताल |
प्रारब्ध | | इच्छा | अनिच्छा | स्वइच्छा |
लक्षण (दोष) | | अव्याप्ति | अतिव्याप्ति | असंभव |
गुरु | | माता | पिता | आचार्य्य |
वादादि | | वाद | जल्प | वितंडा |
वायु | | शीतल | मंद | सुगंध |
ताप | | आध्यात्मिक | आधिभौतिक | आधि दैविक |