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कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

Devanagarihipublished968 पृष्ठ

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शब्दावली

(६२७)

तर्क दुनियाकी करे बिचारी । तर्क आखिर करे नर नारी ॥ दो
वजूद आदमके गावे । बाज बिलवजूद सुमकीन बतलावे ॥
सुमकिन छोड वाजिबमें जाई । वाजिब जाके फेर न आई ॥

समै-बैठ सुकाम लाहूतके, बेचून दिया उपदेश । करता परा
न चीन्हके, झूठा दिया संदेस ॥ झूठे संदेस बहुत सुख उपजा, करके
गरव गुमान । कहें कवीर गये सब धोखे, फिरी मुहम्मद आन ॥

रमैनी २५५-तिहेत्तर फिरके करे विचारा । लामान लाहेको
वारा ॥ आप आपमें झगरा ठाना । अल्लहका भेद काहु न जाना ॥
झगरा करत गये जुग चारी । किनहु न मानी बात हमारी ॥ रुह
नफस निदी मारक आई । रुह इनसान खेतलाफ कहाई ॥ रुह
नवाती लिया अरथाई । जमाती हिया बसाया गार्ई ॥ दिलमें बसे
रुह हैवानी । ले किताब वह कहे कहानी ॥ लामातते आया
जब रूत । जबरूत ते फिर आया मलकूत ॥ मलकूत ते लाहूत
हिराना । लाहूत ते आया नासूत पयाना ॥ अर्जर भया फिर
फकरमें आया । फकरे सुवा न करता पाया ॥

समै-पीर पैगम्बर सब चले, जहं लाहूत सुकाम । कहें कवीर
उपदेश नवीके, जीव गये बेकाम ॥ रसूल गया लाहूतको, उमत्ता
पाछे लाग । जीव करताके सब मरे, बिरले बांचे भाग ॥

रमैनी २५६-आदम सबका पिता कहाया । तीन गेहूँ भिस्तमें
खाया ॥ किया गुनाह जमीं पर डारा । आदम दौवा हुवा कर-
तारा ॥ तिसके भये दो बेटे भाई । एक सुन्नी एक कुफर चलाई ॥
ऐहमकाथ जो किया अजावा । यही खबर दिया कुरानकी तावा ॥
वही असमानते जबरील ले आया । तिनको नवीने जन्म कराया ॥
कुल आलमको दिया उपदेश । दुनिया चली वाहिके भेषा ॥

समै-आदम अल्लह दो कहे, आव अनासर नाह । रुह फिरस्ते