कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
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समै--एकके ऊपर एक भया, अपनी चलावे चाल ।
कहें कवीर किन्हू नाहैं भेजा, यह है अद्वुत रुयाल ॥
रमैनी २४९--तालिव पूजे देव औ देवा । वह परतीत करें नित सेवा ॥
खतमुन्नबी भये तेहि ठाई । सात तवककी छवीना भाई ॥
जाही खतना सब कछु जानी । दिलते बाहर कछु न आनी ॥
जब जबरईल अल्लहने पठाया । महम्मद सोई आयत ले आया ॥
और हुकुम अछाहने दीन्हा । खतामन्नबी बूझ तब लीन्हा ॥
अब प्रगट होय खेलो भाई । किताब कुरान मददकी आई ॥
हिंदू मार करो तुरकाना । करामात सो तन्द ठहराना ॥
यह अल्लह फरमान पठाया । लायहला कलमा लिय आया ॥
एत काद सबे मिल कीन्हा । अकलका कलमा महम्मद दीन्हा ॥
समै--यह सब काम मूसाके जानो, बूझे बिरला कोय । सही बात सबे पतियाना, जीव अमर कैसे होय ॥
तौरीत अंजील मंस्ख करी, ठहरा एक कुरान । ता घर अल्लहको ठहराया, जो है यही इमान ॥
अल्लह पैदा करनेहारा, सो बेचून निदान । कहें कवीर अल्लह यह नाहीं, ठहरा मकां लामकान ॥
रमैनी २५०--रोसन किताब किताब कुराना । सीसी पारेकी आना ॥
अलाह संवासी तहां लिख आई । रोजा नमाज और कछु भाई ॥
सरीयत मिछत नासूत तरीका । हकीकत मारफत लाहूत जबहूता ॥
एक मकानके मकान बहु कीन्हे । नबी खुदाके पाट लिख दीन्हे ॥
तिनमें अटका सब तुरकाना । मूसक भेद विलार न जाना ॥
समै--ठौर ठौर सब छोडके, गया जहां लाहूत ।
कहें कवीर दोनों पछ लूटे, अंसा अंतमें दूत ॥
रमैनी २५१--यह देखो अचरज तुम भाई । किताब कुरान ले