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कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

Devanagarihipublished968 पृष्ठ

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पृष्ठ 264

(२५४)

कबीरपंथी-

व वह हमरहान सवार ॥ दस्तगीरी कर ऐ खुजिस्तः हकीर ।
दूईका परदःअज मियान बरदार ॥ मैं फकीर और मेरा गनीम
गनी । न मुकाबिल हो मुफलिसो जरबार ॥

कोई बाकी रहे न सबमें शोर । कहो सतगुरु कबीर बन्दीछोर ॥१॥
जिस्की जुल्फोंको देखकर लाला । दाग हसरतसे दिल हुआ
काला ॥ सद गुलिस्ताँ निसार खाक कदम । बुलबुलें जिस लिये
करे नाला ॥ दीद बरदीद है न दीद बदीद । माह पर आन कर
पड़ा हाला ॥ तुही खालिक हुआ तुही मखलूक । तुही पैदा किया
तुही पाला ॥ जब उठा पांच तीनका झंडा । सारे नामो निश्राँ
मिटा डाला ॥ तुही जाहिर है और तुही बातिन । तुही जेरीन
और तुही बाला ॥ कदम खाक तेरेकी बरकात । दुश्मने सद ब
जेर पामाला ॥ सिर्फ तेरी मिहरसे यह जग जीव । वे गुमाँ
लामकान ऊपर चाला ॥

कोई बाकी रहे न सरमें शोर । कहो सतगुरु कबीर बन्दीछोर ॥२॥
वे अदद आलमीन् परवर है । ओलिया अम्बियाय सरवर है ॥
बन्दः मुजरिमका जुर्म करदे मुआफ । तू रहीमो करीम बरतर है ॥
जंग मैदानमें हूँ पड़ा घायल न सनाम सैफ ढाल बकतर है ॥
मन मजह्म का तू है जर्गाह । दिले दिलगीरका तू दिलबर है ॥
मने मिसकीन से अपना रुख मत फेर । मुझ ले जाय तेराहि दर है ॥
अब किधर जाऊं छोड दामन को । तेरी साये कदम मेरा घर
है कर जफा या वफा तुझे सब जेब । मुझे मनजूर जो तेरी सिर
है ॥ हैं हुमायूँ नसीब सो जिनके । मूनिसे महे मुदाम दरबर है ॥
कोई बाकी रहे न सरमें शोर । कहो सतगुरु कबीर बन्दी छोर ॥३॥

देख उस रंग रूप रोगनको । तब लिया जान बाजी गर
फनको ॥ शरर अफसाने दीदः हों ताजः । देख जब अपने