कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
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कवीरपंथी—
स्वर्ग भोग्यं मोक्षं भक्तिम् ॥ पुत्रं पित्र्यं वित्तकलत्रं न गुरोरधिकं
न गुरोरधिकम् ॥ २ ॥ वानप्रस्थं पतिविधियर्थं पारमहंस्यं
भिक्षोश्चरितम् ॥ साधोः सेवा भूसुरभक्तिं न गुरोरधिकं न
गुरोरधिकम् ॥ ३ ॥ विष्णोर्भक्तिं पूजनचरितं वैष्णवसेवा मातरि
भक्तिम् ॥ विष्णोः पितॄः सेवनयोग्यं न गुरोरधिकं न गुरोरधिकम्
॥ ४ ॥ प्रत्याहारं चेन्द्रियजयतां प्राणायामं न्यासविधानम् ॥
इष्टः पूजा जपतपभक्तिं न गुरोरधिकं न गुरोरधिकम् ॥ ५ ॥
मत्स्यः कूर्मः श्रीवाराहो नरहरिरूपो वामनदेवः ॥ त्रिभुवनसारो
महिमापारो न गुरोरधिको न गुरोरधिकः ॥ ६ ॥ श्रीभृगुदेवः
श्रीरघुनाथः श्रीयदुनाथो बौद्धसुकल्की ॥ अवतारा दश वेदे प्रोक्ता
न गुरोरधिका न गुरोरधिकाः ॥ ७ ॥ गंगा काशी काश्ची द्वारा
मायाऽयोध्याऽवन्ती मथुरा ॥ यमुना रेवापुष्करतीर्थं न गुरोर-
धिकं न गुरोरधिकम् ॥ ८ ॥ गोकुलगमनं गोपुरमथनं श्रीवृन्दावन
मधुपूरटनम् ॥ एतत् सर्वं सुमहत्पुण्यं न गुरोरधिकं न गुरोरधिकम् ९ ॥
तुलसीसेवा हरिहरभक्तिर्गङ्गसागरसंगममुक्तिः ॥ किमपरमधिकं
रामे भक्तिर्न गुरोरधिकं न गुरोरधिकम् ॥ १० ॥ काली दुर्गा भुवना
बगला श्रीमातंगी धूमा तारा । छिन्ना त्रिपुरा भैरवि कमला न
गुरोरधिका न गुरोरधिकाः ॥ एतत् स्तोत्रं पठति च नित्यं मोक्ष-
ज्ञानं सोप्यतिधन्यः ॥ ब्रह्माण्डांतर्यद्यहेवं न गुरोरधिकं न गुरोर-
धिकम् ॥ १२ ॥
स्तोत्र सर्वमा ।
भूतल काल काल मन पेखि, अभय पद ब्रह्म लखावत कोतो ।
देखि प्रपंच अनेक लुभावन, जो फिरतो मन ठावन टोतो ॥
आप धनी निर्धार कियो, इतने दिन नाहक ऊसर जोतो । को
भवसिन्धु उबारत जीवन, जो कलिनाम कवीर न होतो ॥ १ ॥