कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबोधसागर
( १३ )
मोकाम ३
वैकुण्ठ ते आगे लायो डोरी । सुमेरते सुन्य अठारह कोरी ॥
येतो अथर सुन्य अस्थाना । जबरूत मोकाम ईसाको जाना ॥
ईसा पैगम्बर पढै किताबा । उसका नाम इंजील किताबा ॥
सलामालेक तहाँ हम कीना । दस्ता बोस उनहु उठि लीना ॥
तहँवा बैठि विस्वंबर राई । वही पीर तो वही खुदाई ॥
उहँते अथर सून्य है भाई । ताकी शोभा कही न जाई ॥
मोकाम ४
महाशून्यको लागी डोरी । ग्यारह पलैंग तहाँ ते सोरी ॥
लाहूत मोकाम कहावै सोई । जो देखे बहुते सुख होई ॥
मुस्तफा पैगंबर बैठे तहाँ । फुरकान किताब पढत थे जहाँ ॥
सलामालेक तहाँ हम कीना । दस्ताबोस उनहु उठि लीना ॥
दखत हो मुहम्मद अस्थाना । तुम बेचून कहो यही ठेकाना ॥
वारो फिरिशते सलामालेक कीना । तब हम आगेका पग दीना ॥
मोकाम ५
तहँते चले अचित ठेकाना । एक असंख्य सुन्य परमाना ॥
हाहूत मोकामको वही ठेकाना । आगे हैं सोहं बंधाना ॥
मोकाम ६
तीन असंख्य शून्य परमानी । बाहूत मोकाम सो कहो बखानी ॥
नबी कबीर चले तेहि आगे । मूल सुरति बैठे अनुरागे ॥
मोकाम ७
पांच असंख्य सुन्न विचआही । सात मोकाम कहत है ताही ॥
मोकाम ८
इच्छा सुरतिके पहुँचे द्रीपा । चार असंख्य है लोक समीपा ॥
ताको नाम राहूत मोकामा । नबी कबीर पहुँचे तेहि ठामा ॥