सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished2,136 पृष्ठ

पृष्ठ 749, कुल 2136 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 749

बोधसागर

( ९ )

बौपाई

आठों अंस त्रिदेव समेता । उत्पत्ति जगतकीन प्रभु एता ॥
तीनों दिन त्रैलोकको राज् । तिनवसपरि जिव भयेअकाज् ॥
तिन पुनि एक जुक्ति चित दीना । प्रथम ज्ञान चार जो कीना ॥
प्रथम क्षुद्रजो ज्ञान उपजाई । ध्यान अंशको तौन पठाई ॥
दूसर ज्ञान वाचा है भाई । राज अंशको तौन पठाई ॥
तीसर ज्ञान जो अनुभव कीना । धर्म राय को लेखा दीना ॥
चौथे ब्रह्मज्ञान उपजाई । माय अंश सो ध्यान लगाई ॥
पंचवा ज्ञान सहज की डोरी । सब जीवनकी बंदी छोरी ॥
जहाँसे चार ज्ञान जो आवा । सोई कला निरंजन पावा ॥
निरंजन भये राज अधिकारी । तिनके चार अंश सेवकारी ॥
चार ज्ञानते चारो वेदा । तिनते चारो भये कतेबा ॥
मूल कुरान वेद की वानी । सो कुरान तुम जगमें आनी ॥
हक् कुरान जो तुमको दीना । हद्दहुकम तुम आपन कीना ॥
चार कतेब के चारो अंशा । तिनके कहो भिन्न भिन बंशा ॥
वेद पढावत ब्रह्मा आये । ऋग वेद को नाम लखाये ॥
दूसर यजुरवेदकी वानी । राजनीति सो कीन बखानी ॥
तीसर सामवेदकी बानी । यज्ञ होम तिन कीन बखानी ॥
चौथ अथर्वन गुप्त छपाये । तौन हुकम तुम जगमें आये ॥
ऐकै मूल कुरानमें चारी । चार बीर तुम हो सरदारी ॥
जम्बूर किताब दाऊदने पाई । नासूत मोकाम रहै ठहराई ॥
तौरेत कीताब मूसाने पाई । मलकूत मोकाम रहै ठहराई ॥
इंजील किताब ईसाने पाई । जंबरूत मोकाम रहे ठहराई ॥
फुरकानकिताब नबी तुम पाई । लौहूतमोकाम रहे लौलाई ॥
कुरान वेहदको मरम न पावे । बिनदेखे विश्वास क्या आवै ॥