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सर्वकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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बोधसागर

( १३५ )

मूस विलाई एक सँग, कहु कैसे रहिजाय ॥
अचरज यक देखो संतो, हसती सिंहहि खाय ॥ २१ ॥
पूरण पिण्ड ब्रह्माण्डसो, त्रिगुण फांस लगाय ॥
नाशक नाशे जीवको, आपे आप कहाय ॥ २२ ॥
बन्दी छोड़ छुडावई, मेटि मेटि यम फांस ॥
धन्य धन्य सो जीव हैं, तजहिं महा भोगांस ॥ २३ ॥
प्रभु शरणागति परख दृढ, सत्य लोक परमान ॥
संसत जीव विलास है, दूटा काल गुमान ॥ २४ ॥
पारख सीढी झांकिके, उलटि बहे भवधार ॥
थाह न पावहिं बूडहीं, हो ताके निस्तार ॥ २५ ॥

इति