सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished2,136 पृष्ठ

पृष्ठ 1993, कुल 2136 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1993

७

जीवधर्मबोध

( १९१५ )

जीवन मुक्त केर गुन दोई । त्याग तीसरो कह श्रुति सोई ॥
प्रथम दृश्य जेती जग माहीं । मोते इतर और कछु नाहीं ॥
मैं अद्वैत परमात्म सारा । जीवनमुक्त परम हंकारा ॥
पुनि दुतिया हंकार बखानो । आपको जो अति सूक्ष्म जानो ॥
सर्वा भाग कच तेहैं कीन्हा । दोउ हंकार केर यह चीन्हा ॥
जीवनमुक्तको दोउ हंकारा । पुनि तीजा यहि भांति उचारा ॥
देहको जो आपा करि माना । ऐसी निश्चय तुच्छ बखाना ॥
जाने सत्य जो अपनी देहा । बन्धनको कारण है येहा ॥
शुद्ध आत्मते चित्तको फुरना । ताको नाम अविद्या धरना ॥
दोय भाँतिकी फुरना होई । यक संसार और कह जोई ॥
ताको नाम अविद्या राखा । आत्म और फुर अविद्या भाषा ॥
दोऊ स्पंद रूप उर मद्या । नाश अविद्या करे अविद्या ॥
जो विकल्पको कारण गाई । चित्त शक्ति क्षेत्रज्ञ कहाई ॥
नाम शरीर क्षेत्र सो जाना । तेहि अंतर बाहरको ज्ञाना ॥
नाम तासु क्षेत्रज्ञ कहीजै । सो जब सहित वासना भीजै ॥
आत्मते इतर रूप जो धारे । निश्चय कलना ताहि पुकारे ॥
निश्चय कलना जब सो गहई । बुद्धि नाम ताहीको कहई ॥
अहंभावते निश्चय जोई । पुनि संकल्प ताहिमें होई ॥
ताही कलनाको मन कहिये । चित्तशक्ति मनभाव जो गहिये ॥
घन विकल्प मनमाह जो बंधा । शब्द स्पर्श आदिक भे गंधा ॥
ताते इंद्रियानी फुरि आई । हाथ पांव प्राण आदि बताई ॥
इंद्रिन सहित देह तब भासे । चार खानकी थित कह तासे ॥
अचलते दृश्य दिशा फुरि आवा । तासु नाम संकल्प कहावा ॥
संकल्पहिते सकल पसारा । सबही स्थूल मूल हंकारा ॥
अग्निसवरूपी है हंकारा । ताते तमगुनको बिस्तारा ॥