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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1991

सत्यसुकृत, आदिअदली, अजर, अचिन्त, पुरुष,
मुनीन्द्र, करुणामय, कबीर, सुरति योग, संतान,
धनी धर्मदास, सुरामणिनाम, सुदर्शन नाम,
कुलपति नाम, प्रबोध गुरुबालापीर, केवल नाम,
अमोल नाम, सुरतिसनेही नाम, हक्क नाम,
पाकनाम, प्रकट नाम, धीरज नाम,
उग्र नाम, दयानामकी दया, वंश-
व्यालीसकी दया

अथ श्रीबोधसागरे

एकोनचत्वारिंशस्तरंगः

अथ जीवधर्म बोध

★

दोहा-कौन धर्म है जीवको, सब धर्मन सरदार ।
जाते पाव मुक्ति गति, उतरे भवनधि पार॥
धर्मरूप यक वृक्ष है, मूल गुरु विरूपात ।
ज्ञान फूल फल मुक्ति है, शुभकर्म शाखापात॥
ज्ञान जीवको धर्म है, भ्रम त्रास जो मेट ।