कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसुमिरनबोध
( ३१ )
पांचे हिरण्यमय अंश
तिनको बैठक सुमत अण्डमों दिया अंडको प्रवान पालंग ॥६४॥
वंश सात ॥ ७ ॥
वंशानके नाम
प्रथम वंशपारन, दूसरे स्वांतसनेही, तीसरे भृंगसनेही, चौथे ॥
लरसिध, पांचेदीपकजोत, छठे जलभाव, सातें मलयगिरि ॥७॥
तिनको राजसुमत अंडमें पुरुषके हजूरी ॥
चार गुरुके नाम-लोकके और भवसागरके
प्रथमनाम लोकमें जो हंस कहिये औरभवसागरमेंगुरु चतु-
भुंज गोसाईं तिनके वंश सोरह ॥ १६ ॥ दक्षिण दिशा सामवेद
पुक्षद्वीप दरभंगा शहर तथा प्रकट भये ॥ तिनकोमूलज्ञानबानी
ता बानीले पंथ चलायो, ब्राह्मणकुलप्रकट भये ॥११॥ दूसरे नाम
लोकमें अकह अंश कहिये ॥ २७ ॥ पूर्वदिशा यजुर्वेदकुशद्वीप
करनाटक शहर तहाँ प्रकट भये । तिनको टकसारज्ञानतावाणीले
पंथ चलायो ॥ २ ॥ कायस्थकुल शुद्ध, तीसरेनामलोकमें सुकृत
अंश कहिये और भवसागरमें गुरुधर्मदास गोसाईंकहिये तिनके
वंश व्यालिस ॥ २४ ॥ उत्तरदिशा ऋग्वेद जम्बूद्वीपभरतखण्ड
बांधो शहर तथा प्रकट भये, तिनके कोट ज्ञान बानी ताबानी लै
पंथ चलाये ॥ ३ ॥ चौथे नाम लोकमेंहिरण्यमयअंशकहिये । और
भवसागरमें गुरुसहेतेजी गोसाईं कहिये तिनके वंश सात ॥ ७ ॥
पश्चिम दिशा अथर्वण वेद सिलमिल द्वीप मानिकपुर शहर तहाँ
प्रकट भये । तिनको बीजक ज्ञान बानी ता बानीले पंथ चलाये
क्षत्रियकुल ॥ ४ ॥
दश सोहंगकेनाम
प्रथम पुरुष सोहं दूसरे सहज सोहंग तीसरे इच्छा सोहंग ॥