कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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बांधसागर
चौथे सुकृत अंश
तिनके बैठक सत अण्डमोदिये, अण्डको प्रमान पालंग बहत्तर
॥ ७२ ॥ तिनके वंश बयालिस ॥ ४२ ॥
वंशनके नाम
प्रथम काय सर्वांग रहाई, सर्वांग कायाते बीज बुन्द निरमाई
बीजबुन्दते अविगति काया। अविगत कायाकेदशोंभेदले। कायाके
रूपसुर्त निर्माया। रूप सुर्तके सतगुरु सोहंके गुंग पुरुष कहाये
गुंग पुरुषके अचित पुरुष कहाये। अर्चित पुरुषके ज्ञानी अंश
ज्ञानी अंशके सुजनजन अंश। सुजनजन अंशके चूरा मणी नाम।
चूरामणी नामके सुदर्शन नाम। दूसरे कुरुपति नाम। तीसरे प्रमोद।
नाम। चौथे कवल नाम। पांचे अमोल नाम। छठे सुर्त सनेही नाम।
साते हक्कनाम। आठे याक नाम। नवें प्रकट नाम। दशें धीरज नाम।
ग्यारहें उग्रनाम। बारहें दया नाम। तेरहे गत्र नाम। चौदहें प्रकाश
नाम। पंद्रहें अदित नाम। सोरहें मुकुन्द मुनि। सत्रहें अधरनाम।
अठारहें उर्द्धनाम। उनीसें ज्ञानी नाम। ... बाइसें अजरनाम।
तेइसे रस नाम। चौविसे गंग मुनि। पचीसे पारस नाम छबीस
जाग्रत नाम। सताइसे भुंगमुनि। अठाइसे अखै नाम। उनतीसे कंठ
मुनि। तीसें संतोषदास। एकतीसे चात्रकमुनि। बत्तीसे अजरनाम
तेतीसवें दुर्गमुनि। चौतीसवें आदि नाम पैतीसवें महा मुनि।
छतीसवें निज नाम। सैतीसवें साहब दास। अडतीसवें उर्द्धदास
उनतालीसवें करु। चालीसवें दीर्घमुनि। एकतालीशवें महामुनि।
साखी-वंश व्यालीसके आगम, चूरामणि सँतायन।
वचन हमारा प्रकटे, निःअक्षर निज नाम ॥
तिनको राज सत अण्डमें, चौकी लोक पांजी ॥