सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished2,136 पृष्ठ

पृष्ठ 1823, कुल 2136 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1823

सुमिरनबोध

( १७ )

पुरुषनाम अबोल अडोल नाम । अजावन राय रनछोर नाम ॥
शम्भु सन्तोष नाम । उदैचन्द अक्षैराज नाम ॥
एते नाम रहै लौ लाय । यमराजा तिहि देखि डेराय ॥
अम्बू अपावननाम । अम्बू शम्भू नाम । एत सत्यकाया प्रकाश ॥
अजरनाम नरियर सचार ।
अम्बू नाम वे पुरुष कहावा । सोहं हंस तहाँ विलमावा ॥
सोतो धर्मदासबैठे हैं पुरुषपुरान । सोहं सुर्त तुम मोर सुजान ॥
बेहंग नाम तुम जगमें देहो । हंस छोडाय काल सो लेहो ॥
एही नाम जीव जो पावै । बोधे हंस लोकमें आवै ॥
मैकबीरदरवानीदरवाजेहौंठाठ । आवतजातसुखउपजैहंसनकोनहिंगाठ
एकोत्तरी नाम सुमिरे चितलाई । आवागमन रहित घर पाई ॥

स्मरण हस्तक्रिया

सुनो धर्मदास हस्तक्रिया सही । महापुरुष मुख अपने कही ॥
नरियर अंकुरमो जीव रहाई । तहाँ सुर्त राखो ठहराई ॥
नरियर उठाय हाथ के लेहू । नरियर मस्तिक हाथ जो देहू ॥
सुर्त समय जीवमो गयेऊ । नरियर अमरलोक ले राखेऊ ॥
महा पुरुषके दर्शन कियेऊ । चरण बन्दिके शीश नवायेऊ ॥
महा पुरुष लै अङ्क लगाये । तब हंसा लिये हर्ष समाये ॥
अंकुर अंश बिनवे करजोरी । महा पुरुष सुनी बिनती मोरी ॥
अंकुर अंश नाम लौ लाई । भवसागर ते लेऊ मुक्ताई ॥
महा पुरुष सुर्त उतपानी । जाय सुर्त कडिहार समानी ॥
कडिहार सुर्त लीन्ह चितलोई । सोई सुर्त हंसा मो आई ॥
माथे हाथ जीवके दियेऊ । सुर्त समय हंस मो गयेऊ ॥
गई समय रही ठहराई । बहुत अनंद हंस तब पाई ॥