कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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बोधसागर
सतहतर लाखसो बीरा लीन्हा । सबहीं जीव अमरकर दीन्हा ॥
सतहतरलाखजिवलोकसिधाने । अपने अवगुनसबगये हिराने ॥
तब सिकंदर यक विनती लावा । मिहर गुरुकरि ताहि लखावा ॥
अहो साहिबमोहिंग्रन्थ लखाई । बाचे ग्रन्थ दिल समझाई ॥
तब सदूर हुकुम अस कीना । जस मांग्योशाहतसतेहिदीना ॥
नवी सिन्दको लेहु बुलायी । कागजकमलसबसाथलिवायी ॥
शाह सिकन्दर तुरत बुलाये । सवाला खसोतेही बेर आये ॥
सवालाख देह बीर तब कीना । सोउ सिकन्दर सब सुधिलीना ॥
तनमनधन जब अर्पण कीना । शिरके साट साहब चीन्हा ॥
फिरे शाह जब दिल्ली आये । काजी मुछा सब सुनि पाये ॥
शेखतकी रहे उनपर पीरा । सब मिलि गये उनके तीरा ॥
सब मिल कहैं सुनो मम पीरा । शाहसिकंदर कसभये अधीरा ॥
काशी माहिं गये जब शाहा । कबीरहि कीन्ह गुरु नरनाहा ॥
सुतन तकी बहुते रिसियाना । का तुम कहौअसबातबिराना ॥
ऐसा कैसा ख्याल खिलायो । कैसे मोरा मुरीद फिरायो ॥
चलो जाइये शाह दरबारा । सब मिलि पूछें ज्ञानविचारा ॥
जुलहा मुरीद कससो भयऊ । सो सब पूछें तिसका भैऊ ॥
केहि कारण मुरीद सो हुआ । काजीमुल्ला सब कहैं सूआ ॥
सब मिलि आये भरे दरबारा । बैठे तख्तशाह सरदारा ॥
तिन कहैं आदरशाहभलदीन्हा । तिन पुनि प्रश्न पूछिसो लीन्हा ॥
कहो शाह तुम कहाँ मत पाये । कैसे अपना ईस्म फिराये ॥
काफिर कहैं मुरीदकस तुम हुये । काजीमुल्ला सब कहैं सुये ॥
दीनके घर कहैं टोटा भाई । दीनका कर आदिमो आई ॥
सो तुम कैसे दियो मिटायी । चार बिहिस्त अछाहफरमायी ॥
१ नाम