कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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कबीरबानी
कोड़ लाख है तेरे । बारे हजार नवसै साता । पहुँचे हंस निज
इतने साथ ८००००७१२३६१३१२९०७ ॥
पीढ़ी ३६
छत्तीस बंस और साठ हजारा । तीनसै चौसठ तिन्हके कडि-
हारा ॥ ६०३६४ ॥ पचहत्तर पदम खरब उनचासा । अर्बुद
सात करोड़ पचासा ॥ लाख चार तेरा हजारा सातसै बावन ।
इतने हंस पहुँचे मनभावन ॥ ७५००४९०७५०००४१३७५२ ॥
पीढ़ी ३७
सतीससै वंश और चौसठ हजारा । सातसै पैतालीस हैं कडि-
हारा ॥ ६४७४५ ॥ सत्तर शंख पदम नव होई । छचासी
खर्व नील बावन सोई ॥ नव अर्बुद हैं चौदह करोड़ी । ग्यारे
लाखा बारे हजारा नौसै तेरे जोड़ी । मंडल अठानवें फिरे
दोहार्द । सत्य थापि असत्य उठार्द ॥ ७००९५२८६०९१४१
११२९१३ ॥
पीढ़ी ३८
अडतीसौ वंश बहत्तर हजारा । छहसै तेरा हंस कडिहारा ॥
७२६१३ ॥ शंख तीस और खरब है सोरा । नव अर्बुद करोर
है तेरा ॥ छप्पन लाख हजार चौबीसा । नवसै बहत्तर पहुँचे
हंसा ॥ ३०००००१६०९१३५६२४९७२ ॥
पीढ़ी ३९
उनतालीस वंश और असी हजारा । सातसौ तिहत्तर तिनके
कडिहारा ॥ ८०७७३ ॥ पांच अशंख शंख पंचवीसा ।
चालिस पदम नील एक बीसा । सात खरब अरब है बारे ।
नव करोड़ लाख है छचालु । पंचवीस हजार सातसौ बानी ।
बानी उत्तम जानि बखानी । इतने हंस लोक भल जानी ।