काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)
Kaal Mimansa of Dharma Samrat Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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अतः सभी वेद और वेदानुसारी आर्ष धर्मग्रन्थ भगवद्रूप ही हैं—
‘काव्यालापाश्च ये केचित् गीतकान्यखिलानि च ।
शब्दमूर्तिधरस्यैतद्वपुर्विष्णोर्महात्मनः ॥
( वि० पु० १।२२।८४ )
वे सभी सृष्टि के आरम्भ से ही प्रवृत्त हैं । पाश्चात्यों द्वारा उठाई गयी
प्रक्रिया अधकचरी है । उस प्रक्रिया से तत्त्व निर्णय नहीं हो सकता ।
महाभारत युद्ध
महाभारत युद्ध कब प्रारम्भ हुआ और कब उसका अन्त हुआ ? भीष्म-
पितामह कितने दिनों तक शरशय्या पर आसीन रहे ? अभिप्राय यह कि उनका
निर्वाण संग्राम की समाप्ति और शरशय्या की प्राप्ति के कितने दिन बाद हुआ,
ये सब विचारणीय प्रश्न हैं ।
महाभारत और उसके रचनाकाल के सम्बन्ध में आधुनिक विचारकों ने
बड़े ही समारोह के साथ विचार प्रारम्भ किया है । उनकी प्रामाणिकता पर
महाभारत के सर्वथा अनुरूप विचार अपेक्षित है ।
यह स्मरण रखना आवश्यक है कि भगवान् श्रीकृष्ण ने धर्मभूमि-कुरुक्षेत्र
में युद्धारम्भ से पूर्व विषादग्रस्त अर्जुन को जो उपदेश दिया, वह श्रीमद्भगद्-
गीता नाम से महाभारत में प्रसिद्ध है । अतः महाभारत युद्ध के आरम्भ की
और गीता-जयन्ती की तिथि एक ही होनी चाहिये ।
श्रीमहाभारतकार ने ‘महाभारत युद्ध के पश्चात् धर्मराज युधिष्ठिर के राज्य-
काल में’ कलि का प्रवेश माना है—
ना धर्म्यम भवत् तत्र सर्वो धर्मरुचिर्जनः ।
बभूव नरशार्दूल यथा कृतयुगे तथा ॥
कलिमासन्नमाविष्टं निर्वास्य नृपनन्दनः ।
भ्रातृभिः सहितो धीमान् बभौ धर्मबलोद्धतः ॥
( अश्वमेध० ९४।१९-२० )