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काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

Kaal Mimansa of Dharma Samrat Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ

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दक्षिणी बिहार, पश्चिमी बंगाल एवं छोटा नागपुर के आस-पास लंका की स्थिति
का जो निर्धारण करना है। उसके लिये अभी कोई प्रमाण भी नहीं है। आज
भी लंका नाम से ही जब प्रसिद्ध द्वीप है तब फिर 'लक्का' को 'लंका' कहा
होगा' यह कहने की आवश्यकता ही क्या है। यह नहीं कहा जा सकता कि
लंका नाम की कोई चीज नहीं थी । वर्तमान श्री लंका भी हमारे मत में
रावण की लंका नहीं है। इस लंका का दूसरा नाम सिलोन भी है। ग्रन्थों में
इस सिंहलद्वीप को रावण की लंका से विभिन्न बतलाया गया है।
भारतीय पौराणिक भूगोल के अनुसार आज की श्री लंका महाभारत
का सिंहल द्वीप ही है। वास्तविकता यह है कि वाल्मीकि रामायण में वर्णित
रावण की लंका सर्व साधारण के लिये आज लुप्त हो गई है। वहाँ दीर्घजीवी
लोग रहते हैं। वे सामान्य व्यक्ति द्वारा नहीं देखे जा सकते । आधुनिक भूगोल
वेत्ता भी यह मानते हैं कि सहस्राब्दियों में भूगोल में पर्याप्त परिवर्तन हो
जाया करता है। यह मान्यता बहुसम्मत है कि जहाँ आज हिमालय है वहाँ
पहले समुद्र था। स्वयं डाक्टर साकलिया ने यह माना है कि कुछ टीले ऐसे
रहें होंगे जो इस समय आस्ट्रेलिया की ओर बढ़ गये होंगे। अतः रावण की
लंका आध्यात्मिक एवं भौगोलिक दोनों कारणों से ही लुप्त हो गई है। लंका
को मध्यप्रदेश अथवा इधर-उधर खोजना एक व्यर्थ का प्रयास है। वाल्मीकि
रामायण की कतिपय घटनाओं को अप्रामाणिक मानने के लिये कुछ भी ठोस
तर्क प्रस्तुत नहीं किये गये हैं।
जहाँ तक रावण की जाति एवं संस्कृति का सम्बन्ध है, वाल्मीकि रामा-
यण के अनुसार वह वैदिक संस्कृति में दीक्षित कर्मनिष्ठ ब्राह्मण था। वह
परम तपस्वी पुलस्त्य का पौत्र तथा विश्रवा मुनि का पुत्र था ! आज भी
भारत में पुलस्त्य गाँव प्रचलित है। इन प्रमाणों के रहते हुए भी उसे दूसरी
जाति का व्यक्ति मानने की निराधार कल्पना करना सर्वथा अनुचित है।
यह सही है कि वाल्मीकि रामायण की कथाएँ युगों से गायी जाती रही
हैं। ऐसी स्थिति में यदि उन कथाओं में प्रमाण विरुद्ध अंश आ जाय तो उसमें
कुछ कल्पना का अंश आ सकता है। पर इन कथाओं में ऐसी कोई प्रामाणि-