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जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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पृष्ठ 92

श्चन्द्रस्य कराः=मयूखा
विफला वर्त्तमाना अपि निष्फला भवन्ति
तथैवेत्युपमा । रजोवीर्याभ्यामेवापत्योत्पत्ति-
सम्भवात् तद्विहीनानां नैष्फल्यमुचितमेवेति ॥

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गर्भयोगः
[चक्रम् १: १ र. शु., २, ३ मं., ४ चं. बृ., ५, ६, ७, ८, ९ बृ., १०, ११ शु., १२] योगवैफल्यमाह । इमेऽपत्यसम्बन्धयोगा
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गर्भ है या नहीं है इसके जाननेका विधान यह है कि—प्रश्नकाल वा आधानकाल
में सूर्य, चन्द्रमा, शुक्र और मंगल अपने नवांशमें हों तो निश्चय गर्भ है। यदि इस प्रकार
न हों और पुरुषके उपचय ३।६।१०।११ में सूर्य और शुक्र अपने नवांशमें हों तो भी गर्भका
सम्भव कहे। अथवा स्त्रीके उपचयमें अपने २ नवांशमें