जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५१० सटीकजातकपारिजाते-
चन्द्रमाकी दशामें केतुकी अन्तर्दशा हो तो स्त्रीके रोग, बन्धुका नाश, कुक्षिरोगादि
पीडा, और द्रव्यका नाश हो ॥ ७९ ॥
चन्द्रमाकी दशामें शुक्रकी अन्तर्दशा हो तो स्त्रीसे धनप्राप्ति, हस्ति-पशु आदि जल तथा
वस्त्रका लाभ, सुख, आंखाको रोग हो ॥ ८० ॥
चन्द्रमाकी दशामें सूर्यकी अन्तर्दशा हो तो राजासे ऐश्वर्य प्राप्ति, व्याधिका नाश, शत्रु-
का क्षय, सौख्य और सुख प्राप्त हो ॥ ८१ ॥
आदिमें भावफल, मध्यमें राशि स्थान फल, दशाके अन्तमें जन्मोत्पन्न और दृष्टि उत्पन्न
फल जाने ॥ ८२ ॥
अथ चन्द्रदशायां सर्वेषां ग्रहाणामन्तर्दशाचक्रम् ।
| चं. चं. | चं. मं. | चं. रा. | चं. बृ. | चं. श. | चं. बु. | चं. के. | चं. शु. | चं. सू. | योगः |
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