जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकालचक्रदशाध्यायः ॥१७॥ ५०३
चक्रवाक्यानि—
३, च-र्मी-ओ-गी-रा-य-ध-न-र्क्षम् ॥ ४, त्र-यो-रा-गी-मा-मे-त्ता-म-ह ॥
७, गौ-मां-चा-ची-स-दा-त्रि-क्षुं-न्ने ॥ ८, धि-ज-सित-मि-चा-ज्ञा-रि-का ॥
ऽपसव्यचक्रवाक्यानि— ११,१२,१६,१७,१८,२२,२३,२४
| परमायुर्वर्षाणि | देहाधिपः | राशयः अंशाः |
| प=१ मं=७ | रां=२ शु=१६ | ग=९ बु=३ | मि=५ सू=५ | व=४ चं=२१ | ८६ | चं. | वृश्चकः |
| क्षु=११ श=४ | नि=१० श=४ | धि=९ वृ=१० | र्दा=८ मं=७ | सा=७ शु=१६ | ८३ | शु. | तुला |
| रा=२ शु=१६ | य=१ मं=७ | ध=९ वृ=१० | न=१० श=४ | क्षं=११ श=४ | ८५ | शनिः | कन्या |
| मा=५ सू=५ | से=४ चं=२१ | त्ता=६ बु=९ | स=७ शु=१६ | ह=८ मं=७ | १०० | मं. | सिंहः |
| र्दा=८ मं=७ | स=७ शु=१६ | स्त=६ बु=९ | मे=५ सू=५ | च=४ चं=२१ | ८६ | चं. | कर्कः |
| न=१० श=४ | क्ष=११ श=४ | त्र=१२ वृ=१० | प=१ मं=७ | रः=२ शु=१६ | ८३ | शु. | मिथुनं |
| स=७ शु=१६ | दा=८ मं=७ | त्रि=१२ वृ=१० | क्षुं=११ श=४ | न्ने=१० श=४ | ८५ | श. | वृषः |
| मि=५ सू=५ | वा=४ चं=२१ | ज्ञा=३ बु=९ | रि=२ शु=१६ | का=१ मं=७ | १०० | मं. | मेषः |
| र्दा=८ मं=७ | स=७ शु=१६ | स्त=६ बु=९ | मे=५ सू=५ | व=४ चं=२१ | ८६ | चं. | मीनः |
| न=१० श=४ | क्ष=११ श=४ | त्र=१२ वृ=१० | प=१ मं=७ | रः=२ शु=१६ | ८३ | शु. | कुम्भः |
| स=७ शु=१६ | दा=८ मं=७ | त्रि=१२ वृ=१० | क्षु=११ श=४ | न्ने=१० श=४ | ८५ | श. | मकरः |
| मि=५ सू=५ | वा=४ चं=२१ | ज्ञा=३ बु=९ | रि=२ शु=१६ | का=१ मं=७ | १०० | मं. | धनुः |