जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत?
Wait, compare with 'वृत्ति =':
In 'वृत्ति': व with ri-matra, then 'त्ति'.
In 'तन्नवांशराशिप...': it's 'पतिवशात्' or 'पत्तिवशात्'?
It looks like 'पतिवशात्'. The 'ति' has a single vertical stroke. Wait, look at L16: 'कर्मेशस्थनवांशराशिपवशाद्'.
In L25: 'तन्नवांशराशिपत्तिवशात्' - wait, there is a stroke, could be पतिवशात्. Let's look closely: single loop of त, so 'पतिवशात्'.
Wait, after 'वृत्ति': is it 'वृत्ति' or 'वृत्तिम्'?
Look at: 'वृत्ति = जीविकां' - it has no anusvara, just 'वृत्ति ='.
Let's check L25 end:
"भाग्यविदो विद्वां-"
L26:
"सः, जगुः = ऊचुः । लग्नचन्द्रयोर्दशमेशस्थनवांशपतेर्या वक्ष्यमाणा वृत्तिस्तयैव तस्य जात-"
L27:
"स्य जीवनं वाच्यमिति ॥ ४३½ ॥"
Let's check L28-29:
"लग्न और चन्द्रमा इन दोनोंमें जो बली हो उससे दशमभावका स्वामी जहां स्थित"
"हो उस नवांशपतिसे जीविका कहे ॥ ४३½ ॥"
Let's check