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जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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पृष्ठ 422

३६६ सटीकजातकपारिजाते-
पापाक्रान्ते विगतबलिनि स्वामिनि क्रूरभागे
जातो विद्याविनयगुणधीराजसन्मानहीनः ॥ ४ ॥
इदानीं महीपप्रीतिसम्पत्तिभावाभावमाह—राजस्थाने इति । राजस्थाने = पञ्चमे भावे,
इति । अन्यत्स्पष्टार्थमेवेत्यलम् ॥ ४ ॥
पुत्र स्थानमें बुध, बृहस्पति और शुक्रकी दृष्टि हो, वा योग हो, उसका राशीश (पञ्च-
मेश) बलवान् हो तो राजाकी प्रसन्नतासे धन मिले। यदिपञ्चमेश, पापाक्रान्त हो, बल-
रहित हो, क्रूरभागमें हो तो जातक विद्या, विनय, गुण, बुद्धि और राजसन्मानसे हीन हो ॥
अथ जन्मविचारः ।
लग्नं यानपतौ सुखे तनुपतौ दृष्टेऽथवा खेचरैः
संयुक्ते तु चतुष्पदस्य जननं राहुध्वजाभ्यामजः ।
गोजन्मार्यसितेन्दुभिश्च महिषी मन्देन दृष्टे युते
जातः पादपुरःसरं तनुपतिमनि तनौ भोगिराट् ॥ ५ ॥
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