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सर्वकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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शूल योगमें उत्पन्न हो तो कोपके वशमें रहनेवाला और कलह करनेवाला होवे । गण्ड-
योगमें पैदा हो तो दुराचारी होवे । वृद्धियोगमें उत्पन्न बालक पण्डितके सदृश बोलनेवाला
हो । ध्रुवयोगोत्पन्न विशेष धनी हो । व्याघात योगोत्पन्न घातक हो । हर्षण योगोत्पन्न
ज्ञानी और बड़े यशवाला होवे । वज्रयोगोद्भव धनी और कामी होवे । सिद्धि योगोत्पन्न
सर्वजनका आश्रित, प्रभुके सदृश हो, व्यतीपातका बालक मायावी हो ॥ ९९ ॥
वरीयान् योगका उत्पन्न दुष्कामी हो । परिघयोगवाला विद्वेषी तथा धनी हो । शिव
योगमें उत्पन्न बालक शास्त्रज्ञ, धनी, शान्त और राजाका प्रिय हो । सिद्धयोगका
जन्मा हुआ बालक धर्ममें और यज्ञ करनेमें तत्पर हो । साध्ययोगोत्पन्न शुभ आचरण-
वाला हो । शुभयोगका बालक चञ्चलाङ्ग, धनवान्, कामातुर और कफ-प्रकृति
वाला हो ॥ १०० ॥
शुक्ल योगमें पैदा हुआ बालक धर्ममें तत्पर, चतुर बचन बोलनेवाला, क्रोधी, चञ्चल,
और पण्डित हो । ब्रह्म