जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६६ सटीकजातकपारिजाते-
यदि सूर्य्य, चन्द्रमा तथा मङ्गल तीनों एक स्थानीय हों तो जातक शत्रुओंको मारने
वाला, धनी तथा नीति (कानून) का जानने वाला होवे। यदि सूर्य्य, चन्द्र तथा बुध एक-
त्रित हों तो राजाके समान यशवाला और विद्वान् हो। यदि सू० चं० बृ० एकत्र हों तो वह
गुणवान्, विद्वान्, और, राजाओंका प्रिय होवे। यदि रवि, सोम, और शुक्र एकस्थानी हों
तो वह परस्त्रीगामी, क्रूर, शत्रुसे डरनेवाला, धनिक होवे ॥ ६ ॥
यदि शनि, चन्द्रमा और सूर्य्य एक राशिस्थ हों तो जातक खलबुद्धि, मायावी, विदेश-
प्रिय होवे। सूर्य्य, मङ्गल और बुधके एक राशिमें होनेसे जातक सुख रहित, पुत्र स्त्रीसे
युक्त होवे। बृहस्पति, सूर्य्य और मङ्गलके एकत्र होनेसे लोगोंका विशेष प्रिय हो तथा मन्त्री,
वा सेनापति होवे। चन्द्रमा, सूर्य्य और शुक्र एकत्र हों तो नेत्ररोगी, भोगी, कुलीन और
धनवान् होवे ॥ ७ ॥
शनि सूर्य्य और मङ्गलके एकत्र होनेसे बन्धुओंसे रहित, मूर्ख, धनी और रोगी हो। बृह-
स्पति, सूर्य्य, और बुध एकत्र हों तो चतुरबुद्धि, विद्वान् यशस्वी और धनवान् होवे। सूर्य्य
बुध और बृहस्पति एकत्र हों तो कोमल शरीर, विद्वान्, यशस्वी और सुखी हो। शनि
सूर्य्य और बुधसे बन्धुहीन, धनहीन, वैरी, तथा दुराचारी होवे ॥ ८ ॥
बृहस्पति, सूर्य्य और शुक्रके एकत्र होनेसे पुत्र-स्त्रीसे युक्त, बुद्धिमान्, नेत्ररोगी और
धनवान् होवे। शनि, बृहस्पति और सूर्य्यसे भयरहित, राजप्रिय और सात्विक होवे। सूर्य्य
शुक्र और शनिके एकत्र रहनेपर उत्पन्न हो तो दुष्ट चरित्रवाला, गर्वी, और अभिमानी होवे।
चन्द्रमा, मङ्गल और बुध एकत्र हों तो सदा भोजनमें रत दुष्कर्मी और दूसरोंका दूषक हो ॥
बृहस्पति, चन्द्रमा और मङ्गल एकत्र हों तो रोषयुक्त वचन बोलनेवाला, कामातुर
और रूपवान् हो। चन्द्रमा, मङ्गल और शुक्र एकत्र हों तो विशील, विपुत्र और भ्रमणशील
हो। चन्द्रमा, शनि और मङ्गल एकत्र हों तो चञ्चलबुद्धि, दुष्टात्मा और माताको मारने
वाला होवे। बृहस्पति, चन्द्रमा और बुधके एकत्र होनेसे भारी धनी और राजाका प्रिय होवे। १०
शुक्र बुध और चन्द्रमाके एकत्र होनेसे विद्वान्, नीच कर्म करनेवाला, सेव्य (सेवा
करने योग्य) होता है। चन्द्र-बुध-शनि एकत्र हों तो जातक ज्ञानी, राजपूलित और
गुणवान् होता है। शुक्र, चन्द्रमा और बृहस्पतिके एकत्र होनेसे जातक प्राज्ञ, सुपुत्री और
कलामें निपुण होता है। बृहस्पति, चन्द्रमा और शनिके एकत्र होनेसे जातक पापी,
वृद्धा स्त्रीमें रत और राजाके तुल्य होता है ॥ ११ ॥
शुक्र, चन्द्रमा और शनि एकत्र हों तो वेद जाननेवाला, राजपुरोहित, और अत्यन्त
सुभग होता है। बृहस्पति, बुध और मङ्गलके एकत्र होनेसे गान्धर्व विद्या-काव्य-नाटकका
ज्ञाता होता है। शुक्र, मङ्गल और बुध एकत्र हों तो जातक हीनाङ्ग, दुष्टवंशोत्पन्न और
चञ्चल बुद्धिवाला होता है। बुध, मङ्गल और शुक्रके एकत्र होनेसे प्रेष्य (दूत) नेत्ररोगी
और सदा भ्रमणशील होता है ॥ १२ ॥
शुक्र, मङ्गल और चन्द्रमा एकत्र हों तो राजाका मित्र, सुपुत्री और सुखी होता है।
बृहस्पति मङ्गल और शनि एकत्र हों तो दुबला शरीरवाला, मानी, और दुराचारी होवे।
शनि, मङ्गल और बृहस्पतिके एकत्र होनेसे कुपुत्री, सदा प्रदेशमें रहनेवाला होता है।
शुक्र, बुध और बृहस्पति एकत्र हों तो शत्रुओंको जीतनेवाला और कीर्त्त-प्रतापसे युक्त
होता है ॥ १३ ॥
बृहस्पति, बुध और शनिके एकत्रतासे विशेषसुखी, श्रीमान्, और अपनी स्त्रीका प्रिय
होता है। शनि, बुध और बृहस्पतिके एकत्र रहनेसे झूठ बोलनेवाला, दुष्ट, परस्त्रीगामी
होता है। बृहस्पति, शुक्र और शनिके एकत्र होनेसे स्वच्छ बुद्धिवाला, विख्यात, और
सुखसे युक्त होता है। चन्द्रमा पापग्रह युक्त हो तो जातक अल्पसुखी और सूर्य्य . पापयुत
हो तो उसके पिताको अल्पसुखी जाने ॥ १४॥