जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६४ सटीकजातकपारिजाते-
भास्करे=सूर्ये चान्द्रान्विते (सूर्याचन्द्रमसोर्योगे) जातः स्त्रीवशगः=स्त्रिया वश्यो भवति,
क्रियासु=व्यावहारिककार्येषु निपुणो दक्षो भवति । समौमे रवा=सूर्यमङ्गलयोर्योगे जातो हि
तेजस्वी भवति, बलवान्-सत्त्व-(पराक्रम-)वान् भवति, अनृतवाक्=मिथ्यावादी पापी च भवति ।
सौम्येऽन्विते=बुधेन युक्ते पूषणि=सूर्ये जातो विद्यया, रूपेण, बलेन चान्वितो युक्तोऽस्थिरमति-
श्चपलबुद्धिश्ध भवति । भानौ सजीवे=गुरुसँहिते सूर्ये जातो नरः श्रद्धाकर्मपरः=श्रद्धाकर्मपरा-
यणो नृपस्य=राज्ञः प्रियकरः=आह्लादकश्च भवति । एवं सूँ. शु.⁶, सूँ. श⁷, चँ.⁸ मं., चँ. बुँ.⁹,
चँ. गृ.¹⁰, चँ. शु.¹¹ च. श.¹², मंँ. बु.¹³, मंँ. गृ.¹⁴, मंँ. शु.¹⁵ मं श.¹⁶, बुँ. गृ.¹⁷, बुँ. शु.¹⁸, बुँ. श.¹⁹, गृ. शु.,
गृँ. श., शैँ. श., इत्येकविंशतिभेदा द्विग्रहयोगे सम्भवन्ति । तेषां फलानि सरलार्थकानि
चेति ॥ १-५ ॥
अब दो दो ग्रहोंके योगोंका फल कहते हैं-जिसके जन्म समयमें चन्द्रमासे युक्त सूर्य हो
वह स्त्रीका अनुगामी हो और क्रियामें निपुण हो । मङ्गलके साथ सूर्य हो तो बलवान्,
तेजवान्, झूठ बोलनेवाला और पापी होता है। बुधसे युक्त सूर्य हो तो विद्या-रूप और
बलसे युक्त, चञ्चल बुद्धिवाला होता है। बृहस्पतिसे युक्त सूर्य हो तो श्रद्धाकर्ममें निपुण,
राजाका प्रिय करनेवाला और धनी होता है ॥ १ ॥
यदि सूर्य शुक्रसे युक्त हो तो स्त्रीके द्वारा धनप्राप्त हो और बान्धवोंसे युक्त हो । यदि
सूर्य शनिसे युक्त हो तो प्रायः मन्दबुद्धि और शत्रुके अधीन पुरुषको करता है। यदि
चन्द्रमा मङ्गलके साथ हो तो पुरुष शूर, कुलीन, धर्मात्मा, धनी तथा गुणवान् होता है।
यदि चन्द्रमा बुधसे युक्त हो तो धर्म करनेवाला, शास्त्रका ज्ञाता तथा विचित्र गुणोंसे युक्त
पुरुष हो ॥ २ ॥
यदि चन्द्रमा गुरुयुक्त हो तो जातक साधुजनावलम्बी और पूर्ण बुद्धिमान् हो । यदि
चन्द्रमा शुक्रसे युक्त हो तो वह जातक पापात्मा, क्रय-विक्रय करनेमें कुशल होवे ।
यदि चन्द्रमा शनिसे युक्त हो तो वह जातक बुरी जीवाला, पिताका निन्दक तथा जनहीन
व्यक्ति होवे। यदि मङ्गल बुधसे युक्त हो तो वह जातक वक्ता, औषधका जानकार तथा
शिल्पकलाका ज्ञाता होवे ॥ ३ ॥
यदि मङ्गल जन्म-समयमें बृहस्पतिसे युक्त हो तो पुरुष कामी, पूजनीय, गुणवान्,
गणित शास्त्रका ज्ञाता हो । मङ्गल यदि शुक्रसे युक्त हो तो वह पुरुष धातुओंका व्यवहार
वाला, प्रपञ्च सुननेका प्रेमी तथा धूर्त हो । यदि मङ्गल शनिसे युक्त हो तो पुरुष चहल
करने वाला, गाने बजानेका रसिक और जडबुद्धि हो । यदि बृहस्पति बुधसे युक्त हो तो
पुरुष वक्ता, रूपवान्, गुणवान् और अधिक धनवान् हो ॥ ४ ॥
यदि बुध शुक्रसे युक्त हो तो पुरुष शास्त्र जाननेवाला, गानेका प्रेमी और हँसमुख हो
वे । यदि बुध शनिसे युक्त हो तो पुरुष विद्वान्, धनी, अधिक धर्मात्मा और गुणवान् हो
वे । यदि बृहस्पति शुक्र संयुक्त हो तो जातक तेजस्वी, राजप्रिय, अत्यन्त बुद्धिमान् तथा
बलवान् हो । यदि बृहस्पति शनिसे युक्त हो तो शिल्पकार तथा शनि और शुक्र एकत्रित
हों तो पुरुष अधिक पशुवाला तथा मल्ल (पहलवान्) होवे ॥ ५ ॥
अथ त्रिग्रहयोगाः।
सूर्येन्दुक्षितिनन्दनैरि कुलध्वंसी धनी नीतिमान्
जातश्चन्द्ररवीन्दुजैर्नृपसमो विद्वान् यशस्वी भवेत् ॥
सोमार्काम्रमन्त्रिभिर्गुणनिधिर्विद्वान् नृपालप्रियः, ।
शुक्रार्केन्दुभिरन्यदारनिरतः क्रूरोऽरिभीतो धनी ॥ ६ ॥
मन्देन्द्वर्कसमागमे खलमतिर्मायी विदेशप्रियो
भार्व्वाद्वभूसुतबोधनैर्गतसुखः पुत्रार्थदारान्वितः ॥