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सर्वकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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राजयोगाध्यायः ॥ ७ ॥ २४३
[कुण्डली १ (शुभकर्त्तरी योगः): १२ बु. | १ ल. शु. | २ वृ.] [कुण्डली २ (पापकर्त्तरी): १२ मं. | १ ल. र. | २ श.]
यदि जन्म लग्न शुभ ग्रहसे युक्त हो तो शुभ योग और यदि पापग्रहसे युक्त हो तो
अशुभ योग होता है। लग्नसे बारहवें और दूसरे दोनों स्थानोंमें पापग्रह हों तो पाप-कर्त-
रिक और सौम्य हों तो सौम्य-कर्तरिक योग होता है ॥ १२५ ॥
शुभ योगमें उत्पन्न हुआ नर, खूब बोलनेवाला (वक्ता) रूप, शील, सदाचार तथा
गुणसे पूर्ण रहता है। और पाप योगमें उत्पन्न नर कामी, पापी तथा दूसरोंका पैसा खाने-
वाला होता है ॥ १२६ ॥
शुभ-कर्तरी योगमें उत्पन्न जातक तेजस्वी, धनी और अधिक बलवान् होता है तथा
पाप-कर्तरिकमें उत्पन्न जातक पापी, भिक्षुक, और मलिन चित्त होता है ॥ १२७ ॥
अथ पर्वतयोगः ।
सौम्येषु केन्द्रगृहगेषु सपत्नरण्ध्रे शुद्धेऽथवा शुभयुते यदि पर्वतः स्यात् ॥