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जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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राजयोगाध्यायः ॥ ७ ॥ २२१
लाभे सुखे वा दशमे
समन्दश्चन्द्रमा यदि ।
जातो नृपकुले राजा
तत्समो वा धनी भवेत् ॥ ५३॥
लाभ इति । स्पष्टम् ॥ ५३ ॥
यदि शनिके सहित चन्द्रमा लाभमें,
वा सुखमें, अथवा दशवेंमें हो तो राज-
कुलमें उत्पन्न होने वाला राजा हो, अन्य
राजाके सदृश धनी हो ॥ ५३ ॥
[प्रथम चक्र: लग्न: ल. | चतुर्थ भाव: I. चं. श. | दशम भाव: राजा वा धनी, चं. श. II. | एकादश भाव: III. चं. श.]
जातश्चोपचयस्थिते तनुपतौ चन्द्रे तपःस्थानगे
केन्द्रस्थाः शुभवर्गा यदि शुभा वीर्यान्विता भूपतिः ।
जीवेन्दू वृषभस्थितौ बलयुतः कोणस्थितो लग्नपः
शन्यारेक्षणवर्जितो यदि तदा जातोऽवनीशो भवेत् ॥ ५४ ॥
जातश्चेति । तनुपतौ=जन्मलग्नेशे,