जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६२ सटीकजातकपारिजाते-
इदानीमुन्मादबुद्धियोगमाह—
लग्नत्रिकोणे दिननाथचन्द्रौ शौर्ये गुरौ केन्द्रसमन्विते वा ।
सोन्मादबुद्धिः स भवेत्तदानीं शरासनादौ यदि जन्मलग्ने ॥ ८० ॥
लग्नत्रिकोण इति । यदि शरासनादौ=धनुराश्यादौ जन्मलग्ने लग्नत्रिकोणे (१।५।९)
दिननाथचन्द्रौ = सूर्यचन्द्रमसौ, गुरौ = बृहस्पतौ शौर्य = तृतीये वा केन्द्रे ( १।४।७।१०
भावे ) समन्विते तदानीं=तस्मिन्काले यस्य
जन्म भवेत्स उन्मादबुद्धिर्भवति । तत्काल-
जातोऽगृहीतबुद्धिर्भवतीत्यर्थः ।
अत्र चतुर्थचरणे 'शरासनादौ यदि
जन्मलग्ने' इत्यस्य स्थाने 'शन्यारवारे
यदि जन्मकाले' इति पाठान्तरं सर्वार्थ-
चिन्तामणिकर्त्रा पठितम् । एवं जात-
कादेशे—
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| \ / | \ ल. ८।३° / |
| \ बृ. / | \ / |
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| / सू. चं. \ | / उन्माद- \ |
| / \ | / बुद्धिः \ |
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नवमोदयात्मजस्थौ रविचन्द्रौ भ्रातृकेन्द्रगे जीवे ।
युक्ते शनिकुजवारे जातः सोन्माद इव चपलः स्यात् ॥
इति दृश्यते । अतस्तत्र 'शन्यारवारे यदि जन्मकाले' इति पाठे जन्मकाले यदि
शनिर्वा भौमो भवेदिति व्याख्यानमन्यत्सर्वं समानमेव ॥ ८० ॥
लग्न या त्रिकोणमें सूर्य और चन्द्रमा हों, गुरु ३ रे, वा केन्द्रमें हो और यदि धनुके
आदिमें लग्न हो तो जातककी उन्माद बुद्धि होती है ॥ ८० ॥
इदानीं बुद्धि