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जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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आयुर्दायाध्यायः ॥ ५ ॥ १४५
नवांश होनेसे १ मास, वृष होनेसे २ रा, एवं सिंहसे ५ वां इत्यादि । इसी तरह गुलिक
और चन्द्रमाके योगसे निर्याणका चन्द्रमा याने योग-तुल्य राशिमें जब चन्द्रमार हे तो
मरण हो । एवं लग्न, गुलिक और चन्द्रमाके योगवाले राशिका लग्न निर्याणका लग्न
जानना चाहिये । ( सु. शा. कार ) ॥ ६४ ॥
गुलिकं रविसूनुं च गुणित्वा नवसङ्ख्यया ।
उभयोरैक्यराश्यंशगृहे रविजे मृतिः ॥ ६५ ॥
षष्ठावसानरन्ध्रेशस्फुटैक्यभवनं गते ।
तन्त्रिकोणोपगे वाऽपि मन्दे मृत्युभयं नृणाम् ॥ ६६ ॥
स्फुटार्थौ श्लोकौ ॥ ६५-६६ ॥
गुलिक और शनिको नवसे गुणा करके दोनोंके योगके राश्यंश गृहमें शनिके प्राप्त होने-
पर मृत्यु होवे ॥ ६५ ॥
षष्ठेश, द्वादशेश और अष्टमेशके स्पष्ट राश्यादिका योग करनेसे जो राशि हो उस राशिमें
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