जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Jataka Kathayen (Authentic Hindi Translation from Pali)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
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ग्रहण किया। उसके पुत्र ने जब वह बच्चा ही था गोदी में बैठे बैठे पूछा—
तात ! मुझे अनेक़ार्थ वाला एक कारण, एक बात कहें। यह पूछते हुए उसने
यह गाथा कही—
इङ्घ एकपदं तात अनेकत्थपदनिस्सितं,
किञ्चि सङ्ग्राहिकं ब्रूहि येनत्थे साधयामसे ॥
[तात ! अनेक अर्थपदो से युक्त कोई एक सङ्ग्राहक पद कहें, जिससे
अर्थ की प्राप्ति हो।]
इङ्घ याचना के या प्रेरणा के अर्थ में निपात है। एकपदं एक पद वा
एक बात से युक्त पद। अनेकत्थपदनिस्सितं अनेक अर्थों वा बातो से युक्त।
किञ्चि सङ्ग्राहिकं ब्रूहि कोई एक बहुत से पदो का सङ्ग्राहक पद कहें। अथवा
यही पाठ है। येनत्थे साधयामसे जिस अनेक़ार्थ युक्त एक पद से ही हम अपनी
वृद्धि सिद्ध करे, वह हमे कहें—यही पूछता है।
उसके पिता ने कहते हुए दूसरी गाथा कही—
दक्खेय्येकपदं तात अनेकत्थपदनिस्सितं,
तञ्च सीलेन संयुत्तं खन्तिया उपपादितं;
अलं मित्ते सुखापेतुं अमितानं दुखाय च ॥
[तात ! दक्षता अनेक अर्थपदो से युक्त एक पद है। वह शील और
क्षमा के सहित हो तो मित्रो को सुख तथा शत्रुओं को दुख देने के लिए पर्याप्त
है।]
दक्खेय्येकपदं दक्षता एक पद है। दक्षता कहते हैं लाभ उत्पन्न करने
वाले, हुशियार कुशल आदमी का ज्ञानपूर्ण प्रयत्न (=वीर्य्य)। अनेकत्थपद
निस्सितं इस प्रकार कहा गया वीर्य्य अनेक अर्थ पदो से युक्त। किससे ?
शीलादि से। इसलिए तञ्च सीलेन संयुत्तं आदि कहा। उसका अर्थ है कि
वह वीर्य्य आचारशील तथा सहनशक्ति से युक्त। मित्ते सुखापेतुं अमितानञ्च
दुखाय अलं, समर्थ है। कौन है जो लाभ उत्पन्न करने वाले, ज्ञानपूर्ण कुशल