जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
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विषय पृष्ठ
१२४. अम्ब जातक .. ५५
[ तपस्वी अपने आहार की भी चिन्ता न कर पशुओ
को पानी पिलाता था । वे उसे फलमूल लाकर देने
लगे । ]
१२५ कटाहक जातक ५८
[ दास ने झूठा पत्र लिख एक सेठ की लडकी से शादी
की । स्वामी को पता लग गया । लेकिन तब भी उसने
प्रकट न किया । दास सेठ की लडकी को तग करता
था-भोजन में बहुत दोष निकालता था । स्वामी ने सेठ
की लडकी को एक ऐसा मन्त्र बता दिया कि दास का मुंह
बन्द हो गया । ]
१२६ असिलक्खण जातक ६२
[ एक ब्राह्मण तलवार को सूंघ कर अच्छी या बुरी
बताता था । रिश्वत देनेवाले की तलवार अच्छी, न '
देनेवाले की बुरी ठहरती । किसी शिल्पी ने तलवार के
म्यान मे मिर्चचूर्ण भर अपनी तलवार परीक्षा के लिए
दी । ब्राह्मण को तलवार सूंघते समय छींक आ गई ।
नाक कट गई । पीछे लाख की नाक लगवाई गई ।
एक राजकुमार और राजकुमारी परस्पर स्नेह करते
थे । लोग उनका विवाह न होने देना चाहते थे । राज-
कुमार ने भूत बन छींक कर राजकुमारी को प्राप्त किया ।
छींकने से एक की नाक कटी, दूसरे को राजकुमारी
मिली । ]
१२७ कलण्डुक जातक ६६
[ कटाहक जातक (१२५) के समान है। इस जातक
म सेठ की जगह एक तोते का बच्चा दास को सावधान
करता है । ]