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जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा

स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)

DevanagariHindipublished479 पृष्ठ

पृष्ठ 378, कुल 479 में से

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पृष्ठ 378

कुटिल के प्रति कुटिलता का व्यवहार करने वाले हैं। ठग को भी ठगने
वाले होते हैं। हे पुत्र-नष्ट ! जिसकी फाल खोई गई है उसकी फाल दे। तेरे
पुत्र को जिसकी फाल नष्ट हुई है, वह न ले जाए।]
सठस्स, शठता से, धोखे से कोई ढंग निकाल कर दूसरे का माल खाना
चाहिए, ऐसा समझने वाले शठ के प्रति। साठेय्यमिवं सुचिन्तितं, जो यह
शठता का व्यवहार सोचा है, सो तूने ठीक सोचा है। पच्चोड्डितं पतिकूटस्स
कूट, कुटिल आदमी के प्रति तूने कुटिलता का जाल ठीक फैलाया, उसकी चाल
का जवाब दे जाल फैलाने सा ही किया—यही अर्थ है। फालञ्चे अदेय्युं
मूसिका, यदि चूहे फाल खाएं। कस्मा कुमारं कुळला नो हरेय्युं, जब चूहे फाल
खा जाते हैं तो चिड़ियां क्यो बच्चो को नही ले जाएँगी ?
कूटस्स हि सन्ति कूटकूटा, तू समझता है कि मै ही चूहो को फाल खिला
देने वाला कुटिल पुरुष हूँ; तेरे जैसे कुटिल पुरुष के साथ कुटिलता करने वाले
इस लोक मे बहुत कुटिल है। कुटिल के (भी) कुटिल यह कुटिल के प्रति
कुटिलता करने वालो का नाम है। यही कहा गया है कि कुटिल के प्रति कुटि-
लता करने वाले है। भवन्ति चापि निकतिनो निकत्या, ठगने वाले को ठगने वाला
भी दूसरा आदमी होता है। देहि पुत्तनट्ठ फालनट्ठस्स फालं, भो पुत्र नष्ट-पुरुष !
जिसकी फाल नष्ट हुई है उसकी फाल दे। मा ते पुत्तमहासि फालनट्ठो, यदि
इसकी फाल नही देगा, तो यह तेरे पुत्र को ले जाएगा। जिससे यह न ले जाए,
इसलिए इसकी फाल दे।
“स्वामी ! मैं इसकी फाल देता हूँ। यदि यह मेरा पुत्र दे।"
“स्वामी ! मैं देता हूँ यदि यह मेरे फाल दे।”
इस प्रकार जिसका पुत्र खोया गया था उसने पुत्र पाया। जिसकी फाल
खोई गई थी उसने फाल पाई। दोनो कर्मानुसार गए।
शास्ता ने यह धर्मदेशना सुना जातक का मेल बैठाया। उस समय का
कुटिल व्यापारी ही कुटिल व्यापारी था। पण्डित व्यापारी ही पण्डित
व्यापारी था।
मुकद्दमा फैसला करने वाला अमात्य मैं ही था।