जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
पृष्ठ 124, कुल 479 में से
संदर्भ में पढ़ेंकाक ] १०१
होने से जल में काम बिगडा, सखी के घर पर झगडा होने से स्थल पर काम
बिगडा ।
शास्ता ने यह धर्मदेशना ला जातक का मेल बैठाया। उस समय मछुआ
देवदत्त था। वृक्षदेवता तो में ही था।
१४०. काक जातक
“निच्चं उब्बिग्ग हृदया...” यह शास्ता ने जेतवन मे विहार करते
समय जाति-सेवा के बारे में कही। वर्तमान कथा बारहवें निपात की भद्दसाल
जातक¹ में आएगी।
ख. अतीत कथा
पूर्व समय मे वाराणसी में ब्रह्मदत्त के राज्य करने के समय बोधिसत्त्व
कौए की योनि म पैदा हुए।
एक दिन राजा का पुरोहित नगर के बाहर नदी पर स्नान कर, सुगन्धित
लेप कर, मालाएँ पहन सुन्दर वस्त्र धारण किए नगर में प्रविष्ट हुआ। नगर-
द्वार के तोरण पर दो कौए बैठे थे। उनमें से एक ने दूसरे को कहा—
"मित्र ! मै इस ब्राह्मण के सिर पर बीट करूँगा।"
"यह अच्छा नही है। यह ब्राह्मण ऐश्वर्य्यशाली है। ऐश्वर्य्यशालियो
के साथ बैर करना बुरा है। यह क्रुद्ध होने पर सभी कौवो को भी नष्ट कर
सकता है।"
¹ भद्दसाल जातक (४६५)