जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)
Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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१०६ जगजीवन साहब की बानी
काया भीतर तीरथ कोटि।
जानि परत नहिं मन की खोटि ॥ ३ ॥
ठाढ़े बैठे पग चलाइ।
तस पौढ़े¹ चित अनत न जाइ ॥ ४ ॥
रात दिवस धुनि छूटै नाहिं।
ऐसे जपत रहहु मन माहिं ॥ ५ ॥
गगन पवन गहि करहु पयान।
तहवाँ बैठि रहहु निरबान ॥ ६ ॥
गुरु के चरन गहहु लिपटाइ।
निरखहु सूरति सीस उठाइ ॥ ७ ॥
या है ब्यापि रहे सब माहिं।
देखत न्यारा कतहूँ नाहिं ॥ ८ ॥
जगजीवन कहि मथि पुरान।
यहि तैं सत मत और न आन ॥ ९ ॥
॥ समाप्त ॥
(१) लेटे।