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सर्वकोश
हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)

हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारायण पण्डित द्वारा

स्रोत: हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित) · चौखम्बा विद्याभवन · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished302 पृष्ठ

पृष्ठ 150, कुल 302 में से

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पृष्ठ 150

१३० हितोपदेशः [ सुहृद्भेदः ११९-
उसके पुत्रको कुठीलेमें छुपा कर दंडनायकके साथ वैसेही क्रीड़ा करने लगी. इसके
उपरांत उसका भर्त्ता ग्वाला पौहारसे आया. उसको देख कर गोपीने कहा-'हे
दंडनायक ! तू लकड़ी ले कर क्रोधको दिखाता हुआ शीघ्र जा. उसके वैसा करने
पर ग्वालाने घरमें आ कर स्त्रीसे पूछा-'किस कामसे दंडनायक आ कर यहां बैठा
था ?' वह बोली यह किसी कामके कारणसे पुत्रके ऊपर क्रोधित हुवा था. वह
भाग कर यहां आ घुसा था और मैने उसको कुठीलेमें घुसा कर बचा लिया. और
उसके पिताने यहां ढूंढ कर न देखा इसलिये यह दंडनायक क्रोधित-सा जा
रहा है. फिर वह उसके पुत्रको कुठीलेसे बाहर निकाल कर दिखाने लगी.
तथा चोक्तम्,—
आहारो द्विगुणः स्त्रीणां बुद्धिस्तासां चतुर्गुणा ।
षड्गुणो व्यवसायश्च कामश्चाष्टगुणः स्मृतः ॥ ११९ ॥
जैसा कहा है—स्त्रियोंका आहार दुगुना, बुद्धि चौगुनी, साहस छःगुणा और
उनका काम आठगुणा कहा है ॥ ११९ ॥
अतोऽहं ब्रवीमि—"उत्पन्नेष्वपि कार्येषु" इत्यादि ।' करटको
ब्रूते-‘अस्त्वेवम् । किन्त्वनयोर्महानन्योन्यनिसर्गोपजातस्नेहः कथं
भेदयितुं शक्यः ?'
इसलिये मैं कहता हूं-"कार्यके उत्पन्न होनेमेंभी" इत्यादि !' करटक बोला-
'ऐसाही होय, परन्तु इन दोनोंका आपसमें स्वभावसे बढ़ा हुआ बड़ा स्नेह कैसे
छुड़ाया जा सकता है ?'
दमनको ब्रूते-‘उपायः क्रियताम् । तथा चोक्तम्,—
उपायेन हि यच्छक्यं न तच्छक्यं पराक्रमैः ।
काक्या कनकसूत्रेण कृष्णसर्पो निपातितः' ॥ १२० ॥
दमनक बोला-'उपाय करो । जैसा कहा है कि—जो उपायसे हो सकता है
वह पराक्रमसे नहीं हो सकता है. जैसे कागलीने सोनेके हारसे काले सांपको
मार डाला' ॥ १२० ॥
करटकः पृच्छति—'कथमेतत् ?' । दमनकः कथयति—
करटक पूछने लगा-'यह कथा कैसी है ?' दमनक कहने लगा ।—