सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

Hit Chaurasi of Goswami Hit Harivansh with Commentary

गोस्वामी हित हरिवंश द्वारा

DevanagariHindipublished275 पृष्ठ

पृष्ठ 29, कुल 275 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 29

२४ • • हित चौरासी
श्रीराधा चरन प्रधान हृदय अति सुदृढ़ उपासी।
कुंज केलि दंपती तहाँ की करत खबासी।।
सर्बसु महा प्रसाद प्रसिद्ध ताके अधिकारी।
विधि निषेध नहिं दासि अनन्य उत्कट ब्रत धारी।।
श्रीव्यास सुवन पथ अनुसरै सोइ भलैं पहिचानि है।
(श्री) हरिवंश गुसाईं भजन की रीति सकृत कोउ जानि है।।
– श्री नाभा जी
इन दिव्य विभूतियों का लोक परिचय क्या ? ये तो सदा ही अलौकिक
हैं। जैसे इनका आगमन नित्य लोक से होता है वैसे ही इनका अन्त्य और नित्य
निवास भी नित्य लोक में ही होता है। बीच का जो थोड़ा सा काल आविर्भाव एवं
तिरोभाव के रूप में दीख पड़ता है, एक लीला-कौतुक मात्र है। इस काल में ये
चाहे संसारी की तरह व्यवहार कर लें; चाहे योगिराज की तरह; इन्हें बन्धन तो
मानो छूते ही नहीं। सच तो यह है कि इन्हें जैसा योग वैसा ही भोग। ये नित्य
जल कमल वत् हैं। यदि ये भोगी की तरह रह जाते हैं तो उस भोग में भी महान्
योग की शिक्षा प्रदान कर जाते हैं और तब इनके योग की तो चर्चा ही कौन
करे ? इनके जन्म, कर्म, गुण, रूप सभी अपार होते हैं।
किन्तु विश्व-जनों का स्वभाव भी बड़ा विचित्र है जो ऐसी विभूतियों का
लौकिक परिचय-जल कमलवत् रहनी की जानकारी किये बिना असन्तोष का
अनुभव करता है, तब उन्हें उन्हीं की रीति से परिचय भी देना पड़ता है। इस
दृष्टि से हमारे महाप्रभु पाद का जन्म ब्रज मण्डलान्तर्गत मथुरा के समीप
'बाद' नामक ग्राम में विक्रम संवत् १५५९ वैशाख शुल्क एकादशी सोमवार
को हुआ था। पिता का नाम व्यास मिश्र और माता का नाम तारा रानी था।
व्यास मिश्र कुलीन गौड़ ब्राह्मण थे। विद्वान् होने के नाते प्रतिष्ठित इतने कि
तत्कालीन दिल्ली नरेश सिकन्दर लोदी भी जिनका सम्मान किया करता।
इनके ज्योतिष, आयुर्वेद आदि के ज्ञान पर रीझ कर बादशाह ने इन्हें चार
हजारी मनसब की निधि प्रदान की थी। किसी समय व्यास मिश्र बादशाह के
साथ अपनी राज नगरी देववन (सहारन पुर) से ब्रज मण्डल सकुदुम्ब आये
थे, इसी यात्रा काल में श्रीहरिवंश चन्द्र का जन्म 'बाद' में हुआ था। बाद ग्राम