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हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 42, कुल 254 में से

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पृष्ठ 42

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निज़ाम बड़ी तेज़ी के साथ औरङ्गाबाद की तरफ जा रहा था ।
उसे यह सुन कर बड़ी निराशा हुई कि वह जिस शत्रु से औरङ्गाबाद की
रक्षा करने जा रहा है, वह शत्रु तो गुजरात में पहले ही पहुंच चुका है।
बाजीराव्रो की इस चाल पर निज़ाम को बड़ा क्रोध आया और उसने भी
उसी की नीति का अनुकरण करके अपनी चालाकी से बाजीराव्रो पर
विजय प्राप्त करने का विचार निश्चित किया अर्थात् निज़ाम ने सोचा कि
जिस समय बाजीराव्रो पूना की राजधानी में न रहे, उस समय अचानक
धावा करके पूना को लूट लेना चाहिये । परन्तु बाजीराव्रो की इस युद्ध-
कला को सीखने में भी निज़ाम पीछे ही रहा, क्योंकि बाजीराव्रोने इसकी
यह सब बातें जानकर पहिले ही गुजरात छोड़ दिया और बड़ी शीघ्रता से
निज़ाम राज्य में फिर आ पहुंचा ।

जब निज़ाम पूना लूटने के विचार से बड़ी तेज़ी से उस ओर आ
रहा था, और सोच रहा था कि वह एक शानदार वीरतापूर्ण
कार्य करने जा रहा है, तब उसे यह सुनकर बड़ा दुःख हुआ कि बाजीराव्रो
के पूना लूटने के पहले ही उसका सारा राज्य बाजीराव्रो द्वारा लूट लिया
गया है। इसलिये वह पूना लूटने की आयोजना को त्याग कर बाजीराव्रो
से गोदावरी के किनारे पर मुक़ाबला करने के लिए शीघ्रता से लौटा ।
इस चक्कर में पड़कर निज़ाम की सेना बड़ी थक गई थी । यद्यपि निज़ाम
की इच्छा उस समय, अपनी सेना की दशा देखकर, सामना करने की न थी
तथापि बाजीराव्रो ने उसे युद्ध करने के लिये हठात् विवश कर दिया और
पहले की भांति भागने तथा सामना न करने की अपेक्षा ऐसी चालाकी
तथा बुद्धिमानी दिखाई कि उसके फेर में पड़कर निज़ाम की सेना बाजी-
राव्रो की इच्छानुसार पालखेद् नामक स्थान पर जा डटी । बाजीराव्रो
ने अब सहसा उन पर आक्रमण कर दिया । इससे पहले वह निज़ाम से
टक्कर लेने में हिचकता रहा था ।

यद्यपि निज़ाम के पास बड़ी २ तोपें और बन्दूकें मौजूद थीं, तथापि