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हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 153, कुल 254 में से

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पृष्ठ 153

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बांटी गई।" एक दूसरे पत्र में यह लिखा मिलता है—"इस में कोई शंका
नहीं कि परमात्मा हमारे अनुकूल है, हिन्दू धर्म की रक्षा और वृद्धि के
लिये उसने पेशवा को पैदा किया है—शिशु पेशवा दीर्घायु हो ! हमारी
जाति की आँखों का तारा चिरञ्जीव हो !"
इस लड़के का नाम माधोराव रक्खा गया, क्योंकि लोग इस नाम
को बड़ी श्रद्धा और भक्ति से लिया करते थे। किन्तु थोड़े ही दिनों के
पश्चात् लोगों ने इसे "सवाई ( महान् ) माधोराव" कहना प्रारम्भ कर
दिया। इनके जन्म के कारण पूना स्थित राज्य-क्रांतिकारियों की शक्ति
प्रबल हो गई और भारतवर्ष के राजनैतिक कार्यों की काया पलट
गई। ये लोग अब विशेष साहस और उत्साहपूर्वक कार्य करने लगे
और उन्होंने मरहठे सरदारों को आज्ञा दी कि राघोबा मृत्यु दण्ड
का भागी है इसलिये उसका पीछा करो और जहां कहीं मिले, पकड़ लो।
ऐसा हो जाने पर वे लोग, जो हिन्दू-पद-पादशाही की परम्परा के
अनुसार भाऊ और नानासाहब की अध्यक्षता में शिक्षित हुए थे और जो
मरहठों द्वारा प्राप्त गौरवशाली भारत के सब से महान् हिन्दूराज्य
के पदको संभालने की योग्यता रखते थे, इस योग्य हो गये कि शासन
की बागडोर अपने हाथ में रक्खें और अपनी जाति को इस परम कर्तव्य
पर और अधिक आरूढ़ रखें। यदि ऐसा न हुआ होता तो
राज्य का प्रबन्ध उस व्यक्ति के हाथ में चला गया होता जो अपनी
स्त्री को भी अपने वश में न कर सकता था। किन्तु नारायण के जिस
लड़के की पैदायश के समाचार का स्वागत सारे महाराष्ट्र ने बड़ी धूम-
धाम से किया था और जिस दुधमुँहे राजकुमार को लोगों ने बड़ी श्रद्धा
और भक्ति के साथ अपने राज्य का भावी पेशवा स्वीकार किया था, उसी
राजकुमार को एक नीच प्रकृति वाले पुरुष ने घृणा की दृष्टि से देखा।
जितनी तीव्रता से उसका पीछा क्रांतिकारी और उसका दुर्भाग्य
कर रहे थे उतनी ही तीव्रता से राघोबा एक भयभीत सांड की तरह