हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्द स्वराज्य
आज एक भी आदमी जिंदा नहीं रहता। जो प्रजा लड़ाई का ही भोग (शिकार)
बन गई, उसकी ऐसी ही दशा हुई है। आस्ट्रेलिया के हब्शी लोगों का
नामोनिशान मिट गया है। आस्ट्रेलिया के गोरों ने उनमें से शायद ही किसी
को जीने दिया है। जिनकी जड़ ही खत्म हो गई, वे लोग सत्याग्रही नहीं थे।
जो ज़िंदा रहेंगे वे देखेंगे कि आस्ट्रेलिया के गोरे लोगों के भी यही हाल होंगे।
'जो तलवार चलाते हैं उनकी मौत तलवार से ही होती है।' हमारे यहाँ ऐसी
कहावत है कि 'तैराक की मौत पानी में'।
दुनिया में इतने लोग आज भी ज़िन्दा हैं, यह बताता है कि दुनिया का
आधार हथियार बल पर नहीं है, बल्कि सत्य,
सरकार तो कहेगी कि हम दया या आत्मबल पर है। इसका सबसे बड़ा
उसके सामने नंगे होकर प्रमाण तो यही है कि दुनिया लड़ाई के हंगामे के
नाचें। तो क्या हम नाचेंगे ? बावजूद टिकी हुई है। इसलिए लड़ाई के बल
अगर मैं सत्याग्रही होऊँ तो के बजाय दूसरा ही बल उसका आधार है।
सरकार से कहूँगा "यह हजारों बल्कि लाखों लोग प्रेम के बस रहकर
कानून आप अपने घर में अपना जीवन बसर करते हैं। करोड़ों कुटुम्बों का
रखिए। मैं न तो आपके क्लेश प्रेम की भावना में समा जाता है, डूब
सामने नंगा होने वाला हूँ जाता है। सैकड़ों राष्ट्र मेलजोल से रहे हैं, इसको
और न नाचने वाला हूँ।" 'हिस्टरी' नोट नहीं करती, 'हिस्टरी' कर भी नहीं
लेकिन हम ऐसे असत्याग्रही सकती। जब इस दया की, प्रेम की और सत्य
हो गये हैं कि सरकार के की धारा रुकती है, टूटती है, तभी इतिहास में
जुल्म के सामने झुककर नंगे वह लिखा जाता है। एक कुटुम्ब के दो भाई
होकर नाचने से भी ज्यादा लड़े। इसमें एक ने दूसरे के ख़िलाफ सत्याग्रह
नीच काम करते हैं। का बल काम में लिया। दोनों फिर से मिल-
जुलकर रहने लगे। इसका नोट कौन लेता है?
अगर दोनों भाइयों में वकीलों की मदद से या
दूसरे कारणों से वैरभाव बढ़ता और वे हथियारों या अदालतों (अदालत एक
तरह का हथियार-बल, शरीर-बल ही है) के ज़रिये लड़ते तो उनके नाम
अखबारों में छपते, (अड़ौस-पड़ौस के लोग जानते और शायद इतिहास में
भी लिखे जाते। जो बात कुटुम्बों, जमातों और इतिहास के बारे में सच है,
वही राष्ट्र के बारे में भी समझ लेना चाहिए। कुटुम्ब के लिए एक कानून और
राष्ट्र के लिए दूसरा, ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है। 'हिस्टरी'
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