हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
DevanagariHindipublished258 पृष्ठ
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करना निश्चित होने पर लड़ाई कुछ काल के लिये बंद हुई।
इस बीच में एक दिन राजा ने दुर्ग के प्राचीर पर राधादेवी का
- नाच कराया; उनके चारों ओर बड़ा जमाव था। यह स्त्री क्रम से
क्षण क्षण पर घूमती हुई, जिसे संगीत जाननेवाले ही अच्छी तरह
समझ सकते थे, जान-बूझकर अपनी पीठ अलाउद्दीन की ओर फेर
लेती थी जो किले से थोड़ी दूर नीचे अपने डेरे में बैठा यह देख रहा
था। कोई आश्चर्य नहीं कि वह इस आचरण से रुष्ट हुआ, और कोप
करके अपने पास के लोगों से उनसे कहा कि क्या मेरे असंख्य साथि-
यों में कोई ऐसा है जो इस स्त्री को इतनी दूर से एक तीर से मारकर
गिरा सकता है। एक सरदार ने उत्तर दिया कि मैं केवल एक आदमी
को जानता हूँ जो यह काम कर सकता है, वह उड़्डानसिंह है जिसे
बादशाह ने कैद कर रखा है। कैदी तुरंत छोड़ दिया गया और अला-
उद्दीन के पास लाया गया जिसने उसे उस सुंदर लक्ष्य पर अपना
कौशल दिखाने की आज्ञा दी। उड़्डानसिंह ने आज्ञानुसार वैसा ही
किया, और एक क्षण में उस वीरांगना की सुंदर देह बाण से विद्ध
कर दुर्ग की दीवार पर से सिर के बल नीचे गिरी।
इस घटना से महिमासाह को बहुत क्रोध हुआ और उसने राजा
से अलाउद्दीन के साथ भी वही व्यवहार करने की अनुमति माँगी
जो उसने बेचारी राधादेवी के साथ किया था। राजा ने उत्तर दिया
कि मुझे तुम्हारी धनुर्विद्या का असाधारण कौशल विदित है, किंतु
मैं नहीं चाहता कि अलाउद्दीन इस रीति से मारा जाय क्योंकि
उसकी मृत्यु से मेरे साथ शस्त्र ग्रहण करनेवाला कोई पराक्रमी शत्रु
न रह जायगा। महिमासाह ने तब प्रत्यंचा चढ़े हुए बाण को उड़्डान-
सिंह पर छोड़ा और उसे मार गिराया। महिमासाह के इस कौशल
ने अलाउद्दीन को इतना सशंकित कर दिया कि वह तुरंत अपने डेरे
को झील के पूर्वीय पार्श्व से हटाकर पश्चिम की ओर ले गया जहाँ पर
आक्रमणों से अधिक रक्षा हो सकती थी। जब डेरा हटाया गया तब
राजपूतों ने देखा कि शत्रु ने नीचे नीचे सुरंग तैयार कर ली है, और