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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

पृष्ठ 51, कुल 258 में से

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पृष्ठ 51

( ३७ )
हेतु प्रस्थान करने का संकल्प किया। पहले वह राजा अर्जुन की
राजधानी सरसपुर में गया। यहाँ एक युद्ध हुआ जिसमें अर्जुन
पराजित होकर अधीन हुआ। इसके अनंतर राजा ने गढ़मंडले पर
चढ़ाई की, जिसने कर देकर अपनी रक्षा की। गढ़मंडले से हम्मीर
धार की ओर बढ़ा। यहाँ एक राजा भोज राज्य करता था जो
स्वनामधारी विख्यात राजा भोज के समान ही कवियों का मित्र
था। भोज को पराजित करके सेना उज्जैन में आई जहाँ हाथी,
घोड़े और मनुष्य क्षिप्रा के निर्मल जल में नहाए। राजा ने भी नदी
में स्नान किया और महाकाल के मंदिर में जाकर पूजा की। बड़े
समारोह के साथ वे उस प्राचीन नगरी के प्रधान मार्गों से होकर
निकले। उज्जैन से हम्मीर चित्रकोट (चित्तोर) की ओर बढ़ा और
मेढ़वार (मेवाड़) को उजाड़ करता हुआ आबू पर्वत पर गया।
वेद के अनुयायी होकर भी यहाँ हम्मीर ने मंदिर में ऋषभदेव
की पूजा की, क्योंकि बड़े लोग विरोधसूचक भेदभाव नहीं रखते।
वस्तुपाल के स्तुति-पाठ के समय भी राजा प्रस्तुत थे। वे कई दिन
तक वशिष्ठ की कुटी में रहे, और मंदाकिनी में स्नान करके उन्होंने
अचलेश्वर की आराधना की। यहाँ अर्जुन की कृतियों को देखकर
वे बहुत ही आश्चर्यित हुए।
आबू का राजा एक प्रसिद्ध योद्धा था, किंतु उसके बल ने इस
अवसरपर कुछ काम न किया और उसे हम्मीर के अधीन होना पड़ा।
आबू छोड़कर राजा वर्द्धनपुर आए और उस नगर को उन्होंने
लूटा तथा नष्ट किया। चंगा की भी यही दशा हुई। यहाँ से अज-
मेर की राह से हम्मीर पुष्कर को गए जहाँ उन्होंने आदिवराह की
आराधना की। पुष्कर से राजा शाकंभरी को गए। मार्ग में
मरहटा १, खंडिल्ला, चमदा और काँकरौली लूटे गए। काँकरौली में
१-इस नाम का एक स्थान जोधपुर राज्य में है। जोधपुर राज्य में
नाडोल नाम का एक गाँव है जहाँ आशापुर देवी का स्थान है। रणथंभ से
यदि नाडोल जाया जाय तो मेड़ता बीच में पड़ेगा।

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