हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३८ .हम्मीररासो
कुप्पिय १ मीर खेत चढ़ि बाजै ॥८२१॥
इतै सुसेख राव पद बंदे ।
गहै तेग मन माहिं अनंदे ॥
इतै सेख सदको उत आए ।
आप२ आप जय सद् सुनाए ॥८२२॥
कहै ३ सदकि सुनि साह सुजाँनं ।
ठठा भखर बसि करिए पाँनं ॥
कहा सेख हम्मीर सु रावं ।
उठे युद्ध कौं करि जिय चावं ॥८२३॥
छप्पय छंद
जुटे बीर दुहुँ जंग अंग अनभंग महाबल ।
चढ़े जाँन आमाँन बढ़े निस्साँन ४ बरहल ॥
करि कमाँन करि पाँन काँन लौं करिखह रक्खे ।
धरि नराच गुन राखि धाव करि वेगि बरक्खे ॥
निज संग बीर सत पंचजुत सेख भेखरौ यह धरिव ।
उत खुरासाँन षट सहस ल सदकी सद हांकी करिव ॥८२४॥
तेग बेग बहु कढ़ी मनो पावकक लपट्यो ।
करी बाज नर जुद्द ५ कटे सिर पात्र उपट्टा ॥
परै धरनि धर नचै उदर काट अंत भभक्कै ।
चली रक्त धर धार लुत्थ परि लुत्थ धधक्कै ॥
षट सहस खिसे षुरसाँन दल लिय निसाँन बानै सुबर ।
किए नजर राव हम्मीर कै फबी फते महिमा समर ॥८२५॥
आइ सेख सिर नाय राव कूं बचन सुनाए ।
धनि छत्री चहुवाँन सरन पन जग जस छाए ॥
१ कोपे । २ अप्प अप्प । ३ कहै सदक्की साह सुजाँनं ।
४ नीसाँन । ५ जुष्टि कट्टि ।
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