हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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साह बचन इम कहै मीर महरम खाँ सुनिजे¹ ।
जीति² जंग रणधीर धन्य वह राव सुभनिजे ॥
पतसाह राडि सफजंग³ की मनै करिय आपन⁴ सबै ।
चहुँ ओर जोर उमराव सब किये मोरचा दृढ़ अबै⁵ ॥५०५॥
जबै⁶ राव रणधीर कहै हम्मीर सुणिज्जे⁷ ।
सबै⁸ हिंद को साथ बोलि⁹ रणथंभ सु लिज्जे¹⁰ ॥
लिखि फर्माँनहूँ¹¹ राव बंस छत्तीस बुलाए ।
जुरे जंग चौगाँन उमंग दल बहल छाए ॥
कर जोरि सबै हाजिर भए¹² राव बचन या¹³ विधि कहै ।
मैं गही तेग पतिसाह¹⁴ सों घरि जाहु जौन जीवौ चहै ॥५०६॥
कह काकौ रणधीर राव सुन बचन हमारे ।
अबै छंडि¹⁵ कित जाहिं¹⁶ खाय करि निमक तिहारे ॥
अलीदीन सों जुद्ध छंडि गढ़ चौरै मंडों ।
जिती साहि की सेन मारि खंग खंड बिहंडों ॥
चादूँ¹⁷ सुनीर या वंस को अकथ गत्थ¹⁸ ऐसी करूँ ।
रबि लोक भेदि भेटूँ सुभट अप्प¹⁹ सीस हरं हिय धरूँ ॥५०७॥
दोहरा छंद
कहै राव हम्मीर खाँ, मंत्रि एक²⁰ रणधीर ।
जमीति गढ़ चित्तौर की, अजहुँ²¹ न आइय²² बीर ॥५०८॥
लिखि फर्मांन हमीर तब, पठए गढ़ चित्तौर ।
वंचि²³ खाँन बल्हन²⁴ कुँमर, हर्ष²⁵ कीन नहिं थोर ॥५०६॥
पाद-टिप्पणियाँ (Footnotes)
१ सुनिए । २ जित्ति । ३ सफरजंग । ४ अप्पन । ५ सबै । ६ जब
सुराव । ७ सुणीजे । ८ सभै । ६ राण । १० लीजे । ११ फुरमाना ।
१२ अहै । १३ इम । १४ हजरत्ति । १५ छाड़ि । १६ जायें ।
१७ चाढूँ । १८ गाथ । १६' आप। २० इक्क । २१ अजौं । २२ आए ।
२३ वाँचि । २४ बाल्हन । २५ हर्ष न किन्न्यउ ।
९९-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri