हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
पृष्ठ 165, कुल 258 में से
संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो ७९
अजमंत १ महुम्मद इक अली ।
तिन संग असीसु सहस्स चली ॥४४६॥
तिहिं द्वंद अमंद बिलंद कियौ ।
रणधीर महा रण मेलि लियौ ॥
करि कोप तबै रणधीर मनं ।
वर बैन कहै पन धारि घनं ॥४४७॥
महिमंद २ अली मुख आय जुरचौ ।
दुहुँ बीर तहाँ तब जुद्ध करचौ ॥
अजमंत कमाँन लई कर मैं ।
रणधीर कै तीर कढ्यौ उर मैं ॥४४८॥
रणधीर सु कोपि कै साँगे लई ।
अजमंत कै फूटि ३ कै ४ पार गई ॥
परियौ अजमंत सु खेत जबै ।
महमंद अली फिरि आय ५ तबै ॥४४९॥
रणधीर सु कोपि कै बैन कहैं ।
कर देखि अचै मति भुल्लि ६ रहै ॥
किरवाँन सु धीर के अंग दई ।
कटि टोप कछू सिर माँझ ७ भई ॥४५०॥
तब कोप कियौ रणधीर मनं ।
किरवाँन दई महमंद तनं ॥
परियौ महमंद अमंद बली ।
तब साहि कि सैन सबै जु हली ॥४५१॥
लुथि ८ लुत्थि परैं बहु बीर अरैं ।
बहु खंजर पंजर पार करैं ॥
१ अजमत्ति । २ महमद्द । ३ फुटि । ४ रु । ५ आयौ । ६ भूलि ।
७ माँहि । ८ जुथि ।
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri