गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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राग बिलावल
[ १७ ]
अवध आजु आगमी एकु आयो ।
करतल निरखि कहत सब गुनगन, बहुतन्ह परिचौ पायो ॥ १ ॥
बूढ़ो बड़ो प्रमानिक ब्राह्मन संकर नाम सुहायो ।
सँग सिसुसिष्य, सुनत कौसल्या भीतर भवन बुलायो ॥ २ ॥
पायँ पखारि, पूजि दियो आसन, असन बसन पहिरायो ।
मेले चरन चारु चारचो सुत माथे हाथ दिवायो ॥ ३ ॥
नखसिख बाल बिलोकि बिप्रतनु पुलक, नयन जल छायो ।
लै लै गोद कमल-कर निरखत, उर प्रमोद न अमायो ॥ ४ ॥
जनम प्रसंग कह्यो कौसिक मिस सीय-स्वयंबर गायो ।
राम, भरत, रिपुदवन, लखनको जय सुख सुजस सुनायो ॥ ५ ॥
तुलसिदास रनिवास रहसबस, भयो सबको मन भायो ।
सनमान्यो महिदेव असीसत सानँद सदन सिधायो ॥ ६ ॥
“आज अवधपुरीमें एक आगम जाननेवाला (ज्योतिषी) आया
है । वह हथेली देखकर ही सारे गुण बता देता है । उसके
कथनका कई लोग परिचय पा चुके हैं ॥१॥ वह बूढ़ा ब्राह्मण बड़ा
ही प्रामाणिक है । उसका अति सुन्दर शङ्कर नाम है । उसके साथ
बालक शिष्य भी हैं”—यह सुनकर माता कौसल्याने उसे महलके भीतर
बुलवाया॥२॥ उसके चरणधो, पूजाकर, आसन दियातथा भोजन कराकर
वस्त्र पहनाये । फिर उसके चारु चरणोंमें चारों बालकोंको डालकर उनके
सिरपर हाथ रखवाया ॥३॥ उन बालकोंको नखसे सिखतक निहारकर
ब्राह्मण देवताके शरीरमें रोमाञ्च और नेत्रोंमें जल छा गया । फिर वे